Wednesday, 6 March 2013

इंतज़ार कुछ पल का


दिल ने आवाज़ दी यहीं आस पास है वो मेरे 
जिसकी महक समायी मेरी साँसों में हर पल 
रात दिन बंद आँखों के झरोखों से देखूँ  उसे 
वह खिला खिला सा मुस्कुराता हुआ चेहरा 
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आ रहें है वो जाने कितनी ही मुद्दतो के बाद
जादू भरी निगाहों से अब होंगी ये आँखे  चार 
मेरी धडकनों में शामिल वो जज्बातों में मेरे 
जग उठे है आज लाखों अरमान इस दिल के 
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गुनगुना रहीं है हवाएं मुस्करा उठी फिजायें 
बदलती  रुत में महकने लगी  मेरी तन्हाई 
तेरी खुशबू बसी है मेरी यादों में मेरे ख़्वाबों में 
बस कुछ ही पल इंतज़ार के बाकी है आने में