Wednesday, 4 September 2013

कितनी सुरक्षित आपकी बेटी ?

कितनी सुरक्षित आपकी बेटी ?

कितनी सुरक्षित है हमारी बेटियाँ इस समाज में  ,रह रह कर यह सवाल सुमन को कचोट रहा था .उसकी अंतरंग सखी दीपा  ने रो रो कर अपना बुरा हाल कर लिया था उसके घर की नन्ही कली को किसी ने मसल दिया था और उसके दुःख से सुमन भी बहुत दुखी थी,उसकी आँखों में भी आंसुओं का सैलाब उमड़ आया था ,उसकी जान से भी प्यारी सखी दीपा के घर पर आज मातम छा चुका था |कोई ऐसे कैसे कर सकता है ,इक नन्ही सी जान,एक अबोध बच्ची , जिसने अभी जिंदगी में कुछ देखा ही नही ,जिसे कुछ पता ही नही ,एक दरिंदा अपने वहशीपन से उसकी पूरी जिंदगी कैसे  बर्बाद कर सकता है |दीपा की चार वर्षीय कोमल सी कली के साथ दुष्कर्म,यह सोच कर भी काँप उठी थी सुमन ,कैसा जंगली जानवर था वह दरिंदा ,जिसे उस छोटी सी बच्ची में अपनी बेटी दिखाई नही दी |सुमन का बस चलता तो उस  जंगली भेड़िये को जान से मार देती ,गोली चला देती वह उस पर |आज वह नन्ही सी कली मुरझाई हुई अस्पताल में बेहोश अधमरी सी पड़ी है |अपनी जान से भी प्यारी बेटियों की  सुरक्षा को लेकर आज पूरा भारत परेशान है ,,बलात्कार जैसी बेहद घिनौनी और अमानवीय घटनाएं  तो न मालूम कब से हमारे समाज में चली आ रही है लेकिन बदनामी के डर इस तरह की घटनाओं पर परिवार वाले ही पर्दा  डालते रहते है |सुमन की सहेली दीपा ने पुलिस स्टेशन में जा कर '' एफ आई आर'' भी दर्ज़ करवा दी  ,पर क्या पुलिस उस अपराधी को पकड़ पाए गी ?क्या कानून उसे सजा दे पाए गा ?कब तक न्याय मिल पाये गा उस कुम्हलाई हुई कली को ?ऐसे अनेक प्रश्न सुमन के मन में रह रह कर उठ रहे थे |इन सब से उपर सुमन उस नन्ही सी बच्ची को लेकर परेशान थी ,अगर जिंदगी और मौत में झूल रही वह अबोध बच्ची बच भी गई तो क्या वह अपनी बाक़ी जिंदगी समान्य ढंग से जी पाए गी ?