Monday, 24 March 2014

धरतीपुत्र

धरती से
सोना उगाता
धरतीपुत्र
कहलाता
भर कर
वह
पेट सबका
खुद भूखा
सो जाता
फिर भी
नहीं
घबराता
वह
देख फसल
खड़ी
खलिहान में
मन ही मन
हर्षाता
लेकिन नही
सह पाता
गरीबी सूखा
क़र्ज़ की मार
लाचार
असहाय
दुखी
आखिर
थक
हार कर
जीवन से
वह
छोड़ कर
सबका
साथ
थाम लेता
मौत का
हाथ


रेखा जोशी