Tuesday, 17 June 2014

पल दो पल की जुदाई है [ग़ज़ल ]

ग़ज़ल

बहर /मापनी    
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 ऊँचे ऊँचे पेड़ों पर शब ने ली अंगड़ाई है,
दिल को थामो यारो अब तारों की शाम आई है |
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बस आ जाओ तुम इस दिल को पहचानो सनम मेरे, 
सागर  की   लहरों  सी   गहराई  दिल  में  समाई  है । 
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हमने माना यह तेरी महफ़िल तो खूबसूरत है,
मस्ती के आलम में शहनाई दिल ने बजाई है। 
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इक परछाई है वह तो मत  जाना उधर तुम अब ,
धोखा हर पल दे  हम से की उसने  बेवफाई है । 
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 अच्छा तो अब हम चलते है जाने की घड़ी आई  ,
मत रोना जाने मन तुम पल दो पल की जुदाई है ।

रेखा जोशी