Friday, 15 August 2014

मंजिलें मिलें गी आगे बहुत

माना गम की रात लम्बी है सो जा तू चादर को तान l 
उषा किरण सुबह को जब आए बदल जाये समय की धार l l 
थक कर कहीं तुम रुक न जाना न समझना जीवन को भार l 
मंजिलें मिलें गी आगे बहुत मिले गी तुम को नयी राह l l 

रेखा जोशी