Friday, 19 December 2014

झील की सफेद चादर पर खिलखिलाती है ज़िंदगी

सर्द मौसम में
हो गई
सूनी सूनी सी
ज़िंदगी
छोड़ दिया साथ
पत्तों ने भी
पेड़ों का
सफेद आँचल से अपने
जब
हिम बाला ने
ढक  लिया आवरण
सारा
घने कोहरे में भी
तब
मुस्कुराती है ज़िंदगी
झील की
सफेद चादर पर
खिलखिलाती है ज़िंदगी

रेखा जोशी