Thursday, 2 April 2015

चाँद की मधुर चाँदनी

सुरमई रात
चाँद आसमाँ पे
धरा पे
बिखरती चाँद की
मधुर चाँदनी

पेड़ों के पत्तों से
छन कर
गुनगुनाती हुई
गीत मधुर गाती
खिलखिलाने लगी चाँद की
मधुर चाँदनी

आहट  सुनते ही
उसकी
बिछ गये मखमली फूल
राहों में
पाते ही कोमल
स्पर्श उनका
मुस्कुराने लगी चाँद की
मधुर चाँदनी

लबों पर मेरे
मचलने लगे तराने
उड़ने लगी तितलियाँ
दिल की बगिया में
छा गई बहारे
फ़िज़ाओं में
अँगना  में मेरे
फिर से
महकने लगी चाँद की
मधुर चाँदनी

रेखा जोशी