Thursday, 14 May 2015

अनुपम है सौंदर्य यहाँ हे भगवन सिरमौर

धरा मिले आकाश से
क्षितिज के उस पार
मिथ्या जग को छोड़
आये भगवन तेरे पास
खुल गये सब  द्वार
तेरे मेरे बीच
देख लिया हमने
आर पार सब कुछ
हर्षित मन
देख छटा अलौकिक
विकल नैना ढूँढे तुम्हे
छुपे किधर चितचोर
अनुपम है सौंदर्य यहाँ
हे भगवन सिरमौर

रेखा जोशी



....