Friday, 12 June 2015

आओ जी लें यहाँ हर ऋतु हर मौसम

वक्त की धारा बन
बहता रहा जीवन यहाँ
युगों युगों से इस धरा पर
रात दिन छलते रहे
और जीवनक्रम यहाँ
चलता रहा निरंतर
आते जाते है मुसाफिर
हर पल हर क्षण यहाँ
है कहीं पर हास और
रूदन है कहीं पर
गागर ख़ुशी से है भरी
कहीं अश्रुओं से कलश
धूप आँगन में खिली
घने छाये कहीं पर घन
फिर भी यहाँ पर
धूप छाँव से सजा जीवन
है बहुत अनमोल
आओ जी लें  यहाँ
हर ऋतु हर मौसम
हँसने के पल पाकर हँसले
और रोने के रोकर
दो दिन के इस जीवन का
जी लें हर पल हर क्षण

रेखा जोशी