Wednesday, 21 October 2015

आईना धुंधला गया

आईने में अपनी सूरत देख सेठ धनीराम की आँखों में अजीब सी चमक आ जाती ,पैसे का गरूर उनके चेहरे से साफ़ झलकता था । जब वह अपनी लम्बी सी गाडी में बैठते तो घमंड से उनकी गर्दन अकड़ जाती , आईना  भी धुंधला कर उन्हें वही दिखाता जो वह देखना चाहते थे ,लेकिन नियति को कौन टाल सकता है ,उन्हें तेज़ बुखार रहने लगा ,बड़े से बड़े डाक्टरों के यहां उनके चक्कर लगने  लगे ,जांच के बाद पता चला कि वह ब्लड कैंसर से पीड़ित है और शुरू हो गया लम्बे इलाज का सिलसिला और ईश्वर की कृपा से जब करोडपति धनीराम जी  ,लम्बी बीमारी से उठे  तो ऐसा लगता था कि वह पूरी तरह बदल चुके हों ,वो जब भी किसी से मिलते ,यही कहते ,'',मैने मौत को बहुत करीब से देखा है ,अस्पताल में सारा दिन बिस्तर पर पड़ा यही सोचा करता था ,'' मेरे जैसा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं ,जो मै पैसे का घमंड करता रहा ,आज मेरे पास इतनी दौलत होने पर भी मै अपने को नहीं बचा पाता  तो क्या फायदा'',और वो सभी से  खूब धर्म कर्म  की बाते किया करते,और किसी आश्रम में भी वह जाने लगे थे ,बस अपनी बाकी ज़िंदगी वह परमार्थ में ही बिताना चाहते थे ।

 ऐसा लगता था कि  शायद बीमारी ने  आईने में  उन्हें  उनका  असली चेहरा दिखा दिया हो ,चलो देर आये दुरुस्त आये ,लेकिन कुछ ही दिनों बाद सब लोग उन्हें देख हैरान हो गए  ,जनाब नई औडी गाडी में सवार थे ,वही पुराने रंग ढंग ,वही पैसे का गरूर |इंसान की फितरत  इतनी जल्दी रंग बदलते देख सब लोग दंग रह गए  ,शायद उनके पैसे के गरूर और घमंड से आईना फिर से धुंधला पड़ गया,वह उन सज्जन को वही दिखाने  लगा जो वह देखना चाहते थे |,

रेखा जोशी