Saturday, 28 February 2015

थिरकती रही ज़िंदगी

रंग बिरंगी ज़िंदगी ने
भर दिये
जीवन में अनेक रंग
इंद्रधनुषी रंगों से
कभी
सजाया  जीवन
कहीं
छलके ख़ुशी के रंग
कहीं
गहराये  गम के रंग
फिर भी बेखबर
चलती रही ज़िंदगी
भरे थे जिसमे
उम्मीद के रंग
भूल कर सब गम
आशा के संग
थिरकती रही ज़िंदगी

रेखा जोशी

ज़िन्दगी का सफर

न  जाने क्यों  बिन तुम्हारे  सूनी  सूनी  सी है हर डगर 
यूँ  तो  चलते  हुये  कट ही जायेगा  ज़िन्दगी का  सफर 
मिल  ही   जायेंगे  हजारों  साथी  यूँ   ही  चलते  चलते 
मजा तो तब है जब सफर में साथ हो इक हसीं हमसफर

 रेखा जोशी 

Friday, 27 February 2015

वेद वचन

1 ओम विश्वानि देव सवितुदुर्रितानि परासुव ।
यदभद्र्म तन्न्यासुव। । 

हे स्रष्टा संसार के ,दुःख दुर्गुण दूर करो ।
हे पालक सर्वजगत के ,जो भला वह दो । ।

2 यो भूतं च भव्यं च सर्वयश्चाधितिशृति .।
सर्वस्य च केवलं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रहमो नमा :। ।

जो भूत है और भविष्य जो ,औ यह सब जो वर्तमान है ।
सर्वाधार सुख स्वरूप ,उस परम बह्म को प्रणाम है । ।

3 यस्य भूमि प्र्मान्तरिक्षमतो उदरम ।
दिवं यश्चक्षे मूद्रानं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रहमो नमा :। ।

पृथ्वी जिसकी पदस्थली और अन्तरिक्ष उदर समान है ।
दिव्य लोक मस्तक है जिसका ,उस परम बह्म को प्रणाम है । ।

[ प्रो महेन्द्र जोशी ]

Thursday, 26 February 2015

नहीं था वो मै

झांक कर
देखा
मन के आईने में 
नही पहचान पाया
खुद को
धूल में लिपटे
अनेक मुखौटे
नहीं था वो मै
मूर्ख मनवा
पहचान ले खुद को
साफ़ कर ले धूल को
और
फेंक दे सब मुखौटे
कर पहचान
असत्य
और
सत्य की
रेखा जोशी

जी लें भरपूर ज़िंदगी

है बदल रही
ज़िंदगी
हर घड़ी हर पल
मिला जो अब
शायद
न मिले कल हमे
ढल रही हर सुबह
शाम में
जी लें भरपूर
ज़िंदगी
हर घड़ी हर पल
यह वक्त
जो है हमारा
अब
कल रहे न रहे
नैनो  में भर लो
ज़िंदगी के हसीन पल
संजो ले हसीन यादे
इन खूबसूरत पलों की
और
जीवन भर पीते रहें
हम
आनंद से भरपूर\
यह
यादों के प्याले

रेखा जोशी

Thursday, 19 February 2015

खुल गया पिटारा यादों का

तस्वीर देख अपनी
चौंक उठी 
नही तस्वीर यह मेरी
हाँ कोई
है जाना पहचाना सा चेहरा
छिप चुका जो कभी 
वक्त के आँचल तले
कुछ अदद सी यादें समेटे 
खुल गया पिटारा
यादों का
और
खो गई उनमे मै
फिर से एक बार

रेखा जोशी

निकल पड़े घर से न ठौर है न ठिकाना


ढूँढ  रही  है  निगाहें  मंज़िल अनजान
गुम हो गई अब राहे मंज़िल अनजान
निकल पड़े घर से न ठौर है न ठिकाना
मिलेगा पथ हो चाहे  मंज़िल  अनजान

रेखा जोशी



Wednesday, 18 February 2015

कतरा कतरा आँसू पिलाती रही ज़िंदगी हमें

रफ्ता रफ्ता देखो यह  जलाती  रही ज़िंदगी हमें
दर्द ए गम  से  हरदम  मिलाती रही ज़िंदगी हमें
सहलाया पत्तों ने भी शबनम  की बूँदों को सजन
कतरा  कतरा  आँसू  पिलाती   रही  ज़िंदगी हमें

रेखा जोशी 

आने से तेरे आ गई है बहारें


तुम पर हमारा दिल दीवाना आ गया
फूल को चमन में  मुस्कुराना आ गया
आने   से   तेरे    आ    गई   है   बहारें
लो आज यहाँ  मौसम सुहाना आ गया

रेखा जोशी

Monday, 16 February 2015

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें ।

ओम नमः शिवाय ,ओम नमः शिवाय ,ओम नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय -   सभी मित्रों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें ।
है शिवशंकर महादेव की महिमा अपरम्पार 
आओ मनायें मिलकर शिवरात्रि का त्यौहार
बरसो की तपस्या पूर्ण हुई गौरी की तब
पहनाया जब शंकर को जयमाला का हार
रेखा जोशी

Sunday, 15 February 2015

भागती दौड़ती ज़िन्दगी

 भागती दौड़ती
ज़िन्दगी
जहाँ देखा भीड़ ही भीड़
हर कोई
है भाग रहा 
मंज़िल कहाँ मालूम नही
है अंतहीन यह 
दौड़ इच्छाओं की 
चाहतों  तृष्णाओं की
रूकती नही
है भागती जाती

रेखा जोशी

सूनी है आज यह राहें जहाँ पर कभी फूल खिले थे

बिछुड़  गये वह  मीत  मेरे  जीवन  पथ  पर हमे मिले थे 

बीत गये अब वह मधुर क्षण  जब  तुम संग  मेरे चले थे 

चुपचाप  कहीं  छुप  गया  वह  मनोहर  सा  सुंदर चेहरा 

सूनी  है  आज  यह  राहें  जहाँ  पर  कभी  फूल  खिले  थे 

रेखा जोशी 




 

Saturday, 14 February 2015

जय जय करें तेरी मानव बना महान

मिल रहा विज्ञान से हमें नित नया ज्ञान
खोजने  नव दुनिया यह  भर रहा  उड़ान 
बेताब  है   यह    जीतने     ब्रह्मांड   को   
जय जय  करें  तेरी  मानव  बना  महान 

रेखा जोशी 

देखने को बेताब यह आँखें



मन में बसाई तेरी इक झलक
दिल में समाई तेरी इक झलक 
देखने  को  बेताब  यह  आँखें 
नयन में छाई तेरी इक झलक 

रेखा जोशी 


हम होंगे कामयाब


क्या हुआ अगर ऊपर छत नही है ,टूटा फूटा खंडहर हुआ तो क्या हुआ ,जब अखबार  बेचने वाला देश का राष्ट्रपति बन सकता है ,एक चाय वाला प्रधानमंत्री पद पर आसीत हो  सकता है तो हम क्यों नही कामयाब हो सकते ।   अगर मन में हो विश्वास तो इस  खंडहर में भी हम शिक्षा ग्रहण कर कामयाब हो सकते है ,बस कुछ कर गुज़रने की इच्छा होनी चाहिए । हम होंगे कामयाब एक दिन ।

रेखा जोशी 

Between the edges I'm flowing river

Singing Waves
Between the edges
I'm  flowing river

In my lap
Playing fishes
Continuous flowing
Silence in the quiet valleys
Striking  my sweet tone
Vibrant tunes of
Singing waves
Between the edges
I'm flowing river

 Extitement in heart
 Like a damsel
Wavy and smiling
Leaping and bouncing
Dancing
Singing Waves
Between the edges
I'm  flowing river



Rekha Joshi

हैप्पी वैलेंटाइन्स डे

अपने  माँ बाप पर
लुटा कर नेह
दुआओं से उनकी
अपनी झोली भर लें
पोंछ आँसू किसी के
जीवन में उनके
प्यार का रंग भर दें
खुशियाँ बाँट कर सबसे
अपनी खुशियाँ दुगनी कर लें

HAPPY VALENTINES DAY TO ALL FRIENDS

रेखा जोशी


Thursday, 12 February 2015

न जाने कल बिछुड़ जायें कभी मीत

खिले  है  फूल  गाती  ज़िंदगी आज 
मिली  है  प्रीत  भाती  ज़िंदगी आज 
न जाने कल बिछुड़ जायें कभी मीत 
हमें साजन   मिलाती  ज़िंदगी आज 

रेखा जोशी 

Wednesday, 11 February 2015

प्यास बढ़ती रही और प्यास बढ़ती रही

मधुरस  ज़िंदगी का हम पिये जा रहे है
मदहोश सा जीवन हम  जिये जा रहे है
प्यास बढ़ती रही और प्यास बढ़ती रही
तमन्ना  और  पीने  की किये जा रहे है

रेखा जोशी 

कर न दे कहीं जला कर यह दिल को राख

महक  अपनी   से  हमे  लुभाते   है  फूल
मत   कर  प्यार  खार  भी चुभाते है फूल
कर न दे कहीं जला कर यह दिल को राख
कभी  कभी  आग  भी   बरसाते  है  फूल
रेखा जोशी 

रहे सिर पर हमारे गर हाथ उसका

कर के  विश्वास  उस  ईश्वर  पे  देखो 
उसकी  कृपा  पर यकीन कर  के  देखो
रहे  सिर  पर  हमारे  गर  हाथ  उसका 
भरता   झोली  वह   मुरादों   से   देखो 

रेखा जोशी 

बातों ही बातों में गुज़र जाते है पल


देखते ही तुम्हे महक जाते है पल 
बातों ही बातों में गुज़र जाते है पल 

तुम तो न आये बस यादें है पास 
यादों ही  यादों में गुज़र जाते है पल 

गाते है गीत गुज़रे हुये हसीं लम्हे 
गुनगुनाते उन्हें ही गुज़र जाते है पल 

दर्द ए गम ही मिला प्यार में हमें 
उसी दर्द के सहारे गुज़र जाते है पल 

भटकते रहते उन्ही लम्हों में हम 
उन्ही लम्हों की महक में गुज़र जातें है पल 

रेखा जोशी 

हसीन लम्हे

तेरी यादें है
दिल के अरमान
हसीन लम्हे
..................
पूरे हो गए
खामोश वादियों में
अरमां मेरे
................
जिंदगी मेरी
है शामे मुहब्बत
सौगात तेरी
..................
खुशनसीब
सिलसिले प्यार के
जो  हुए मेरे
.....................
मासूमियत
पलकों में छुपा है
चेहरा तेरा

रेखा जोशी 

Tuesday, 10 February 2015

भोर भई और खिलते रहे है वन उपवन


सुनहरा  आँचल  सागर का चूम रहा गगन 
सूरज  के  चमकने  से  है  चल  रहा जीवन 
पल पल देखो बदल रही समय की यह धार
है  भोर  भई और महकता अब  रहा चमन 
रेखा जोशी 

जायें तो कहाँ जायें रहे विचार जीव असहाय

फैला प्रदूषण
हर तरफ
जल हो या थल
या हो फिर चाहे गगन
जायें  तो कहाँ जायें
रहे विचार जीव असहाय

रहने को पेड़ नहीं
पानी में मिला मल
हस्ताक्षेप कर प्रकृति से
रुष्ट किया उसे मानव ने
विषाक्त है  धरा गगन
घुला  पानी में ज़हर
जायें  तो कहाँ जायें
रहे विचार जीव असहाय

लुप्त हो रही
प्रजातियाँ कई
रहने का ठौर ठिकाना नहीं
जायें  तो कहाँ जायें
रहे विचार जीव असहाय

रेखा जोशी

Monday, 9 February 2015

डगर डगर डोलते रहे हम मिले नही तुम


ढूँढा  हर  गली प्यार भर अंजुल   नही मिली
यूँ  तो लाखों मिले मगर स्नेहिल नही मिली
डगर  डगर  डोलते  रहे  हम  मिले  नही तुम
 है  राहें बहुत मिली पर  मंज़िल  नही  मिली

रेखा जोशी 

आवारा लहर सी ख्वाहिशे अपनी

किससे मिलेगा अब हम को सहारा
नाम  तेरा  ले कर  तुम  को  पुकारा
आवारा  लहर  सी  ख्वाहिशे  अपनी
कैसे  मिलेगा  अब  इन को  किनारा

रेखा जोशी 

Sunday, 8 February 2015

पथ में पलक बिछाये इंतज़ार करते रहे

तुम्हारी चाहत लिये   हम पल पल मरते रहे
पथ   में  पलक   बिछाये  इंतज़ार करते  रहे
दिन  का सुकून और रातों  की नींद  उड़ गई
अनजान बने  तुम्ही इस दिल में धड़कते रहे

रेखा  जोशी 

आवाज़ हो मीठी तो बनेगे सबके बिगड़े काम

जीत लेते सभी  दिलों को प्यार के दो  मीठे बोल
मीठे  बोल से  ही बने   रहते यह  रिश्ते अनमोल
आवाज़  हो  मीठी  तो बनेगे  सबके  बिगड़े काम
कुछ भी कहने से पहले तोल ले फिर बाद में बोल

रेखा जोशी

Saturday, 7 February 2015

आप को अपना बनाने की तमन्ना की है

आप को  अपना बनाने की तमन्ना की है
आज तो  हद से गुज़रने  की तमन्ना की है
...
खिल गई बगिया बहारें जो चमन में आई
गुल खिलें  दिल ने महकने की तमन्ना की है

दिल हमारे की यहाँ धड़कन लगी है बढ़ने
क्या करें दिल ने मचलने की तमन्ना की है

देखते ही आपको यह क्या हुआ साजन अब
खुद इधर दिल ने बहकने की तमन्ना की है

लो शर्म से अब सनम आँखे झुका ली हमने
नैन में अपने बसाने की तमन्ना की है

रेखा जोशी 

संडे को बनाना है फंडे

सुबह सुबह 
मिल गई चाय 
बिस्तर पर बैठे बिठाये 
देख श्रीमती जी को 
शर्मा जी मुस्कुराये 
हाथ पकड़ बोले 
चलो भाग्यवान 
आज संडे मनाये 
कुछ हमारी सुनो
कुछ अपनी सुनाओ
सुनते ही प्यार भरी बाते

श्रीमती जी के माथे  पे 
बल आये
हाथ झटक कर
वह गुर्राई
है आपके लिए
यह संडे फंडे
हमे तो हफ्ते भर का
काम बुलाये

आओ मिल कपडे धोयें
फिर खाना बनायें
बच्चों को होमवर्क कराये
शाम को घर के लिये
हफ्ते भर का मार्किट से
सामान लायें
संडे को बनाना है फंडे
तो जल्दी से तैयार हो जाईये
घर के हर काम को संग हमारे
मज़े लेते हुए
करते जाईये
बात सुन श्रीमती जी की
शर्मा जी बोले
काम वाम को भूल जायें
आज एक
अच्छी सी मूवी देख आयें


रेखा जोशी 

Friday, 6 February 2015

गूँजे सदा तेरी इन नीरव घाटियों में

ढूँढ  रहे  प्रभु  तुम्हे इन  हसीन  वादियों में 
आती  नजर  छटा   तेरी  पत्ते   बूटियों में 
है कण कण में ओम देखा मन की नजर से 
गूँजे   सदा   तेरी  इन  नीरव  घाटियों  में 

रेखा जोशी 

हर पल जी लें ज़िंदगी जी भर के

छोटा सा जीवन मेरा
क्षण क्षण
फिसलता हाथों से
धीरे धीरे
हो रही खत्म कहानी
तेरे  मेरे प्यार  की
आज हूँ पास तेरे
न जाने कल क्या होगा
कहीं दूर सो जाऊँगा
आगोश में मौत के
या डूब जाऊँगा
यादों के समुंदर में
जब तुम न होगे पास मेरे
इससे पहले कि
बिछुड़ जाएँ हम दोनों
हर पल जी लें ज़िंदगी
जी भर के
लम्हा लम्हा
ज़िंदगी का पी लें
जी भर के

रेखा जोशी



Thursday, 5 February 2015

अनवांछित मोड़ [क्षणिका ]

क्षणिका

हँसती मुस्कुराती
ज़िंदगी में जाने क्यों
आ जाते कुछ
अनवांछित मोड़
टूट जाता दिल जब
लगता सुबकने मन
सजल नैनो से
विदा करते अपनों को
सदा सदा के लिए

रेखा जोशी 

रहे झोंकते धूल नेता हमार

दिखाते    रहे   लोग  सपने  हसीन 
दिखाते    रहे   रूप   अपने   नवीन 
रहे    झोंकते    धूल    नेता   हमार 
किया नाश बुद्धि ज्ञान सबने विहीन 

रेखा जोशी 

औरत एक रूप अनेक

नारी जीवन
ममता की मूरत
लुटाती  प्रेम
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
बन कर माँ
है पालन करती 
इस जग का
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भार्या बनती
है कदम कदम
साथ निभाती
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
औरत एक
है ममता लुटाती
रूप अनेक
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सूना आँगन
जो नही महकता
बिन बिटिया

रेखा जोशी 

लहराती थी डाली जहां कभी खिलते थे फूल

सूख  गये  पत्ते  अब  डाली  डाली  भी  सूख  चुकी 
खड़ा फिर भी ठूठ अब  माली की नज़र भी उठ चुकी 
लहराती  थी  डाली   जहां   कभी   खिलते  थे  फूल  
निष्फल जीवन जीने की अब तो आस भी टूट  चुकी 

रेखा जोशी 

Tuesday, 3 February 2015

बहुत रुलाया तुम्हे इस ज़ालिम जमाने के तानो ने

मोतियों से आँसू  जब तेरी आँखों से बहते है 
इस दिल में इक टीस सी उठती है जिसे हम सह्ते है 
बहुत रुलाया तुम्हे इस ज़ालिम जमाने के तानो ने 
आ छुपा लूँ  दिल में दिलोजाँ से हम तुम्हे चाहते है 
रेखा जोशी 

टूटते तारे से माँग लिया साथ तुम्हारा

संग  चाँद  सितारे   फिर  भी रात अधूरी है
तुम्हारे  बिना  यहाँ  पर  हर  बात अधूरी है
टूटते  तारे  से  माँग  लिया   साथ  तुम्हारा
मिल गया साथ फिर भी मुलाकात अधूरी है

रेखा जोशी 

Monday, 2 February 2015

उठती हूक सी दिल में देखते ही तुम्हे

न जाने क्यों कभी कभी ऐसे लगता है
जानता  युगों  युगों  से  वैसे  लगता है
उठती हूक सी दिल में  देखते ही तुम्हे
साथी  हो हर  जन्म के जैसे  लगता है

रेखा जोशी 

Sunday, 1 February 2015

हाइकु

हाइकु  

चमक रही
सूरज की तरह
सरसों पीली
...............
बिखर गई
खुशिया सब ओर 
लाया बसंत
................
सोंधी महक 
लहराती सरसों 
आया बसंत
................
बगिया मेरी
महक उठी आज
आया बसंत
..............
नमन तुझे
दो मुझे वरदान
माता शारदे

रेखा जोशी

खिलते रहे बगिया में यूँही पीले पीले फूल

झूम रहे
धरा पर 
पीले पीले फूल

हौले हौले
बह रही
संगीतमय लहर
दे रही हिलोरे
मदमस्त बसंती पवन
गा रहे गीत
दिल में 
गुनगुनाते  फूल

मुस्कुराते हुये 
खिलखिला रहे 
लहराते धरा  पर
पीले पीले  फूल

मन में उमंग लिये 
उड़ती जाये 
चुनरिया गोरी की 
खिलते रहे 
बगिया में यूँही 
पीले पीले फूल 

रेखा जोशी