Sunday, 20 March 2016

समाज में बढ़ते नैतिक अवमूल्यन

समाज में बढ़ते नैतिक अवमूल्यन

एक समय था जब भारत में रामराज्य हुआ करता था जिसकी मिसाल हम आज भी देतें है | युग बदले , समय के चलते संस्कारहीन और संवेदनशून्य समाज उभर कर आ गया है जो दिशा भ्रमित हो चुका है ,,न तो माँ बाप के पास समय है अपनी संतान को सही दिशा दिखाने का और न ही संतान के पास समय है अपने माँ बाप के लिए |

हम सब जानते है कि माँ बच्चे की प्रथम गुरु होती है ,माँ द्वारा दिए हुए संस्कार उसकी औलाद का जीवन संवार सकते है ,लेकिन बहुत दुःख की बात है कि आज भी नारी को वह सम्मान नही मिल पाया जिसकी वह हकदार है अगर नारी सशक्त है तो वह अपनी संतान को नैतिकता का पाठ पढ़ा कर सम्पूर्ण राष्ट्र को सशक्त बना सकती है | कहने को तो नारी सशक्तिकरण पर लम्बे लम्बे भाषण दिए जाते है ,कार्यक्रम किये जाते है परन्तु अगर उनके घर में देखा जाए तो अधिकतर घरों में नारी की आज भी वही स्थिति है ,उसे ऊपर उठने ही नही दिया जाता , पुरुष का अहम नारी को सदा दबा कर रखता है और ऐसी दयनीय स्थिति में कुंठित हुई नारी अपनी संतान को जो दिशा दिखानी चाहिए वह ऐसा नही कर पाती ,पति पत्नी के आपसी झगड़ों के कारण भी नन्हे कोमल बच्चों की मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है । जब कोई पुरुष नशे में धुत अपनी पत्नी से गाली गलौज याँ मार पीट करता है तो उस घर में नारी के साथ साथ बच्चों के सुकोमल मन पर भी गहरी चोट लगती है और वह अंदर ही अंदर घुट कर रह जाते है ,लेकिन उनके भीतर दबा हुआ आक्रोश एक दिन ज्वालामुखी बन फूट पड़ता है ,और अगर वहां आर्थिक परेशानी हो तो भावी पीढ़ी का भटकाव सुनिश्चित हो जाता है ,उनका आक्रोश अपराधिक प्रवृति की ओर उनकी दिशा बदल लेता है |

हमारे देश में अमीर ओर गरीब के बीच खाई जैसी असमानता ,लूटपाट को जन्म देती है ,एक के पास इतनी धन दौलत और दूसरे के पास दो जून खाने के लिए निवाला तक नही ,ऊपर से महंगाई की मार , बेरोज़गारी ,आखिर कहाँ तक इंसान नैतिकता को झूला झूलता रहेगा ,जब उसके बच्चे रोटी मांगेगे तो वह क्या करेगा ,याँ तो चोरी करेगा याँ आत्महत्या ,उसके पास और कोई विकल्प नही बचता | अगर देखा जाए तो आज पूरा देश भ्रष्टाचार में बुरी तरह से लिप्त है ,हर कोई अपनी जेब भरने में लगा है ,चाहे वह कोई बड़ा अफसर हो याँ फिर एक चपड़ासी ,हर कोई लालच में अंधा हो रहा है ,इसी लालच के चलते दहेज की आग में न जाने कितनी मासूस युवतियों को झोंक दिया जाता है |

कहते है यथा राजा तथा प्रजा ,,जब हमारे नेता इतने धोटाले कर रहे है तब कोई चपड़ासी क्यों नही रिश्वत ले सकता है ,आज हम सब व्यवस्था परिवर्तन की बात करते है ,अपने स्थान पर यह सही भी है ,लेकिन इसके साथ साथ हमे भी अपने विचारो एवं आचार को भी बदलना होगा ,नैतिकता का पाठ पढ़ाना तो बहुत आसान है ,लेकिन उस पर चलना भी अग्नि परीक्षा से कम नही है ,नैतिक अवमूल्यन हमारे घरो से गुज़र कर समाज और फिर राष्ट्र को दागदार कर रहा है | अगर हम नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहते है तो हमे घर ,समाज और राष्ट्र सब ओर से अनैतिकता पर प्रहार कर हर ओर एक स्वच्छ वातावरण प्रदान करना पड़ेगा |

रेखा जोशी