Monday, 6 June 2016

आधार छन्द - विधाता 
मापनी - 1222 1222 1222 1222 

निभाया  प्यार हमने  ज़िंदगी तुम पर लुटाये  है
मिले जो  दर्द सीने  में उसे हमने  दबाये  है
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कहाँ जाये करें क्या राह में बैठे अकेले हम
निहारे राह तेरी पर सजन आँखे बिछाये है

दिये  धोखे हमें सबने ज़माने के सताये है
सजी  महफ़िल सजन तेरी चले हम आज आये है
.....
खिलेगे  फूल बगिया में नहीं किस्मत हमारी में
सजन बादल घनेरे ज़िंदगी में आज छायें है

कहें क्या अब किसे कैसे यहाँ दिल की लगी को हम
दिखायें हम किसे यह ज़ख्म जो दिल में छिपाये  है

रेखा जोशी