Friday, 29 July 2016

करेंगे याद हम तुमको सदा अपने फसानों में

सभी वो तोड़ बन्धन अब उड़े हैं आसमानों में 
परिंदे कब रहा करते हैं हर दम आशियानों में 
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न रोको तुम न बांधों आज ज़ंजीरें यहाँ पर तुम 
रहेंगे कब तलक छुप कर परिंदे इन मकानों में 
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कहीं तुम दूर उड़ जाना बसा लेना नया घर फिर 
न  रोकेंगे  चले  जाना  नयें अपने  ठिकानों  में 
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न भरना आँख में आँसू न मुड़ कर देखना हम को 
चले जाना यहाँ से दूर खोये तुम  उड़ानों में 
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सदा तेरे लिये हमने खुदा से प्यार ही माँगा 
करेंगे याद हम तुमको सदा अपने फसानों में 

रेखा जोशी