Monday, 1 August 2016

छन्द- स्रग्विणी

छन्द- स्रग्विणी 
मापनी - 212 212 212 212

लोग  जीवन  ख़ुशी से बिताते रहे
राज़ सब से सजन हम छिपाते रहे 
ज़िन्दगी में रहा प्यार सपना यहाँ 
हम दिखाते नहीं प्यार अपना यहाँ 
रेखा जोशी
... 
मुक्तक 
 लोग  जीवन  ख़ुशी से बिताते रहे 
राज़ सब से सजन हम छिपाते रहे 

ज़िन्दगी में रहा प्यार सपना यहाँ 
दर्द सह  कर सजन मुस्कुराते रहे 

रेखा जोशी