Monday, 15 August 2016

आज हमसे ज़िन्दगी रूठी हुई है क्या करें

प्यार हमने क्या किया चर्चे यहाँ   कितने हुए
इक ज़रा सी ज़िन्दगी में  इम्तिहाँ कितने हुए
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कब तलक गम को छिपा कर ज़िन्दगी जीते रहें
लब खुले भी गर कभी फिर  राज़दां कितने हुए
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आज हमसे ज़िन्दगी रूठी हुई है क्या करें
प्यार में धोखे मिले हम को  यहाँ कितने हुए
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मुस्कुरा कर प्यार से  साजन हमें देखा इधर
अब हमारी हर ख़ुशी  पे   महरबाँ  कितने हुए
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जी नही सकते  सजन तेरे बिना यह ज़िन्दगी
आज तो हम उड़  न पाये  आसमाँ  कितने हुए

रेखा जोशी