Monday, 22 August 2016

नन्ही सी चिड़िया

हो रही बेताब
छूने को आसमान
नन्ही सी चिड़िया
है फड़फड़ा रहे पँख
भरने को उड़ान
सीने में अग्न
हौंसले बुलन्द
जाग जाते अरमान
देखते ही गगन
लेकिन खींच लेते
नीचे नीड़ पर
चहकते उसके बच्चे
पुकारते उसे
थम जाते वहीं उसके
फड़फड़ाते पँख
नेह नैनों में लिए
भर लेती उन्हें
अंक में अपने
सिमट आते नन्हे मुन्हे
उसके फड़फड़ाते पँखों में

रेखा जोशी