Monday, 19 September 2016

अपमानित घुटन भरी ज़िंदगी

बेटी भारत की
कर गई ज़ख्मी
पूरे देश को
थी वह निर्भया
रही संघर्षरत
हार गई
जंग जीवन की
कानून बदले
हालात बदले
लेकिन
नही बदली मानसिकता
नही बचा पाती
अस्मिता अभी भी
झेल रही कहीं
तेज़ाबी हमले
हो रही शिकार कहीं
खूंखार दरिंदो का
झेल रही पीड़ा
जी रही अभी भी
अपमानित
घुटन भरी ज़िंदगी

रेखा जोशी