Tuesday, 20 September 2016

दिल में बसते तुम ही तुम हो जब प्रीत हुई तुमसे अपनी

दुर्मिल सवैया [ वर्णिक छंद ]24 वर्ण
दुर्मिल सवैया = सगण X 8  या, ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ

समझा जबसे  हमने तुमको मिलती नज़रें तबसे  अपनी 
दिल में  बसते तुम ही तुम हो जब प्रीत हुई तुमसे अपनी 
मिलते तुम जो  खिलती रहती बगिया दिल की हमसे अपनी 
अब ढूंढ रही नज़रें तुम को मिल बात कहो  सबसे अपनी 

रेखा जोशी