Sunday, 27 November 2016

मुस्कुराते अधर बाँवरे मेरे नयन

सुहानी चाँदनी  से भीगता यह बदन
हसीन ख्वाबों के पँखों  तले मेरा मन
सँग  लिये कई  रँग उड़ने लगी चाहतें
मुस्कुराते   अधर   बाँवरे  मेरे  नयन 

रेखा जोशी