Friday, 16 December 2016

सफर नीर का पर्वत से सागर तक

क्षणिका 

सफर नीर का
पर्वत से सागर तक
या फिर
सागर से पर्वत तक
चलता जा रहा
निरंतर
रुकता नही
ज़िंदगी भी रूकती नही
जीवन मृत्यु 
है एक सिक्के के 
दो पहलु 
है आज गर जीवन 
कल मृत्यु 
लेकिन 
मृत्यु के बाद भी
है जीवन 
बदलता
केवल स्वरूप
उसका

रेखा जोशी