Friday, 30 September 2016

पाक को हमने सबक अब है सिखाना

पाक को हमने सबक अब है सिखाना
आज भारत को जहाँ में है उठाना
.
साँस दुश्मन को मिटा कर आज लेंगे
साथ मिलकर है बुराई को मिटाना
.
मिट गये है देश पर लाखो सिपाही
आज कुर्बानी ज़माने को बताना
,
देश के दुश्मन छिपें घर आज अपने
पाठ उनको ढूँढ कर अब है पढ़ाना
.
प्यार से मिलकर रहें आपस सदा हम
आज मिलकर देश को आगे बढ़ाना
रेखा जोशी

ज़िन्दगी की कसम ज़िन्दगी मिल गई

देख  कर आप को यह ज़ुबाँ सिल गई  
मुस्कुराती हुई  हर  कली  खिल  गई 
पा  लिया  प्यार हमने  पिया का यहाँ 
ज़िन्दगी की कसम ज़िन्दगी मिल गई 

रेखा जोशी 


यूँ तो लाखों मिले तुम सी स्नेहिल नहीं मिली

ढूँढा  हर  गली प्रेम  भरी महफ़िल नहीं  मिली
यूँ  तो लाखों मिले तुम सी स्नेहिल नहीं  मिली
डगर  डगर  डोलते  रहे  नहीं  मिले  तुम   हमे
 है  राहें बहुत मिली मगर  मंज़िल  नहीं  मिली

रेखा जोशी 

Thursday, 29 September 2016

हे कैलाश नाथ 
बम बम भोले 
बर्फानी बाबा 
लीला तेरी न्यारी 
हे त्रिपुरारी 
सब कुछ खत्म 
हो जाता  यहां 
पिघल जाता 
लोहा भी
इक दिन
चूरा हो जाता 
पहाड़ भी 
ले बहा जाता
समय संग अपने
रह जाती
बस माटी
समाया बस तू
कण कण में
छू नही सकता 

जिसे
समय कभी

भी 
तुम ही तुम 
हो बस 
इस सृष्टि में 

रेखा जोशी 

उड़ गई नींद आज नैनो से मेरे साजन

भागती जाये  ज़िन्दगी रूकती नही है 
हूँ  मै  तुमसे  दूर कहीं और तू कहीं है 
उड़ गई नींद आज नैनो से मेरे साजन 
आ  चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही है

रेखा जोशी 

है खिलखिलाते फूल कोयलिया यहाँ कुहुके सजन

हरिगीतिका छंद
प्रदत्त मापनी - 2212 2212 2212 2212 

गाये बहुत है गीत मिलकर  प्यार में चहके सजन 
आओ चलें दोनों सफर यह प्यार का महके  सजन 
... 
हसरत  रही  है  प्यार  में  हम  तुम  रहें साथी सदा 
मुश्किल बहुत है यह डगर इस पर रहें मिलके सजन 
..... 
खिलते  रहें अब फूल बगिया मुस्कुराती ज़िन्दगी 
है खिलखिलाते फूल कोयलिया यहाँ कुहुके सजन
....
मिलते रहें हम तुम भरी  हो प्यार से यह ज़िन्दगी
देखो न हमको यूँ   हमारा अब  जिया धड़के सजन
.....
दिन रात करके  याद हम तुमको यहाँ खोये रहें
आ साथ मिलकर हम चलें न'फिर कदम बहके सजन

रेखा जोशी

न तुम रूठना प्यार अपना दिखा कर

कहाँ ज़िन्दगी तुम चली हो  बुलाकर 
नहीं हम करेंगे गिला दिल दुखा कर 
.... 
दिखाते नहीं हाल दिल का किसी को 
सुनायें  किसे बात  अपनी  बता कर 
...... 
खिले फूल उपवन सजा आज अँगना 
गई ले सजन रंग  तितली चुरा कर 
.... 
चली  है हवा  आज  मौसम  सुहाना 
कहाँ  ले  गई  साथ  आंधी  उड़ा कर
... 
हमें  छोड़ जाना नहीं तोड़ना दिल 
न तुम रूठना प्यार अपना  दिखा कर 

रेखा जोशी 


Wednesday, 28 September 2016

श्रद्धा से करते श्राद्ध हम

आते है याद बहुत
नमन करते हम उन्हें
छोड़ कर
जो चले गए दूर हमसे
सदा सदा के लिए
थे जो कभी हमारे अपने
..
लगता है कभी कभी
है वो आस पास हमारे
रखते ध्यान हमारा
अर्पण करते उन्हें नेह से
पसन्द था जो उन्हें
श्रद्धा से करते श्राद्ध हम
थे जो कभी हमारे अपने
....
उनकी आत्मा की
शांति के लिए
पिंड तर्पण करते
दे कर अर्ध्य सूरज को
शत शत नमन करते
दे कर श्रधांजलि उन्हें
थे जो कभी हमारे अपने

रेखा जोशी





भगोड़ों ने सिपाही मार डाले रात में आ कर


1222 1222 1222 1222

छुरा  घोंपा  लगाई  आग  नफरत  की  पड़ोसी ने 
निहत्थे   वीर   मारे  वो  शरारत   की  पड़ोसी  ने 
भगोड़ों ने   सिपाही  मार  डाले  रात   में  आ कर 
जमीं  रोयी  गगन रोया जो' हरकत की पड़ोसी ने

रेखा जोशी 

सजा दिये पुष्प मुझ पर

सँवर गया  जीवन  यहाँ
रहा  अब  ठूठ  बन  यहाँ
सजा दिये पुष्प मुझ पर  
महकाते  कण कण यहाँ

रेखा जोशी 

ज्योति सदा जलती रहे माँ शारदे

दीप ज्ञान  का जला   हे  माँ शारदे
ज्योति  सदा जलती रहे माँ शारदे 
फैले  जगत  में उजियारा ज्ञान से
शत शत नमन करें तुझे माँ शारदे

रेखा जोशी 

Tuesday, 27 September 2016

करें इंतज़ार सब हमारे घर लौटने का

परिवार   हमारी   जान   हमें   देता    सहारा 
थामते  सब  अपने  जब जहाँ  करता  किनारा 
करें   इंतज़ार  सब  हमारे  घर  लौटने  का
गले मिल सभी से हमें  सकून मिलता प्यारा

रेखा जोशी

जमीं रोयी गगन रोया जो' हरकत की पड़ोसी ने

पड़ोसी  ने  यहाँ  घोंटा  गला  इंसानियत   का है
किया नापाक उसने  कर्म वह खोटी नियत का है
जमीं रोयी गगन रोया जो' हरकत की पड़ोसी ने
दिया  है  आज  उसने  दर्द  वह  हैवानियत का है

रेखा जोशी 


घूँघट में शरमाये नैना , नैनो में दीदार लिखें

सावन बरसा आँगन मेरे , चलती मस्त बयार लिखें
मिलजुल कर अब रहना सीखें प्यारी इक बौछार लिखें
….
भीगा मेरा तन मन सारा ,भीगी मलमल की चुनरी
घूँघट में  शरमाये नैना ,  नैनो में दीदार लिखें

झूला झूलें मिल कर सखियाँ ,पेड़ों पर है हरियाली
तक धिन नाचें मोरा मनुवा ,है चहुँ ओर बहार लिखें
….
गरजे बदरा धड़के जियरा ,घर आओ सजना मोरे
बीता जाये सावन साजन ,अँगना अपने प्यार लिखें
….
नैना सूनें राह निहारें ,देखूँ पथ कब से तेरा
आजा रे साँवरिया मेरे ,मिल कर नव संसार लिखें

रेखा जोशी

Monday, 26 September 2016

न जाने कब ज़िन्दगी की शाम हो जाये

ज़िन्दगी अपनी यूँही तमाम हो जाये
ख़्वाब न कहीं तेरे नाकाम हो जायें
कर ले यहाँ पूरी सभी हसरते अपनी
न जाने कब ज़िन्दगी की शाम हो जाये
रेखा जोशी

महालक्ष्मी 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद

महालक्ष्मी 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद
212 212 212
साथ तेरा मिला जो पिया
आज लागे नहीं  है जिया
पास  आओ  हमारे अभी
काश आ के न जाओ कभी
....
देख के रूप तेरा पिया
चाँद भी आज शर्मा गया
रात को रौशनी है मिली
मीत मै  संग तेरे चली
....
है ख़ुशी आज गाते  रहें
ज़िन्दगी जाम पीते रहें
प्रीत को  तोड़ जाना नही
छोड़ना साथ आता नही

रेखा जोशी

Sunday, 25 September 2016

भूख


एक सुसज्जित भव्य पंडाल में शहर के मशहूर सेठ धनीराम के बेटे की शादी हो रही थी |लड़कियाँ और महिलायें सुन्दर सुन्दर वस्त्रों से सजी और आभूषणों से लदी हुई इधर उधर टहलते हुए एक दूसरे से हंसी मज़ाक कर रही थी | कुछ मनचले लड़के और लडकियाँ फ़िल्मी गानो की धुन पर झूम झूम कर थिरक रहे थे | अपने बेटे की शादी में सेठ जी ने खूब अच्छे से इंतज़ाम कर रखा था ताकि उनके मेहमानों को किसी भी तरह की कोई असुविधा न होने पाये | पंडाल का माहौल बहुत ही दिलकश और खुशनुमा था | नाच गानों की महफ़िल के साथ साथ पंडाल के भीतर अनेकानेक देशी और विदेशी स्वादिष्ट व्यंजनों की महक सब को लुभा रही थी | कहीं शराब का दौर चल रहा था तो कहीं लोग तरह तरह की ड्रिंक्स और गर्मागर्म सूप पी कर लुत्फ़ उठा रहे थे | हर कोई खुश और आनन्दित दिखाई दे रहा था | अपनी अपनी प्लेट में विभिन्न विभिन्न व्यंजन परोस कर शहर के जाने माने लोग उस लज़ीज़ भोजन का आनंद उठा रहे थे |खाना खाने के उपरान्त वहां अलग अलग स्थानों पर रखे बड़े बड़े टबों में वह लोग अपना बचा खुचा जूठा भोजन प्लेट सहित रख रहे थे ,जिसे वहां से सफाई कर्मचारी उठा कर पंडाल के बाहर रख देते थे |पंडाल के बाहर न जाने कहाँ से एक मैले कुचैले फटे हुए चीथड़ों में लिपटी औरत अपनी गोदी में भूख से रोते बिलखते नंग धडंग बच्चे को लेकर एक बड़े से टब के पास आ गई और उस टब में से लोगों की बची खुची जूठन से खाना निकाल कर जल्दी जल्दी खाने लगी और साथ ही साथ अपने भूख से रोते बिलखते हुए बच्चे के मुहं में भी डालने लगी |उसके पास खड़ा एक कुत्ता भी टब में मुहं डाल कर जूठी प्लेटे चाट रहा था |

रेखा जोशी 

मातृ भूमि पर मर मिटे देकर जान


हुये जननी जन्म भूमि पर कुर्बान
भारत पर कर दिये  नौछावर प्राण
भाव विभोर हो शत शत करते नमन
मातृ भूमि पर मर मिटे  देकर जान

रेखा जोशी 

Saturday, 24 September 2016

प्यार की धुन पर सजन फिर से बजी शहनाइयाँ

तुम मिले साजन  हमें अब मिट गई तनहाइयाँ
अब  हमारे  बीच तो  बढ़ने लगी नज़दीकियाँ
..
साज़ मेरी ज़िन्दगी का बज उठा दिल में सजन
प्यार की धुन पर सजन फिर से बजी शहनाइयाँ
.... 
साथ तेरा पा लिया पाई बहुत हमने  ख़ुशी
हसरतों की शाख पर अब   खिल उठी थी डालियाँ 
... 
मिल गया जो प्यार तेरा मुस्कुराई ज़िन्दगी 
अब लगी चलने यहाँ फिर प्यार की पुरवाइयाँ 
... 
है पुकारे रेख उनको जो हमारे है सनम 
साथ तेरा है निभाया बन तिरी परछाइयाँ 

रेखा जोशी 

Friday, 23 September 2016

भूल जाओ आज परेशानियाँ तुम


बन के रह गई ज़िन्दगी अफ़साना
न आया तुमको कभी प्यार निभाना
.. 
आया नहीं करना तुम्हे प्यार सजन 
बना दिया तुमने हमको  दीवाना 
... 
देती खामोशियाँ  आवाज़  तुमको 
सुन आवाज़ मेरी  तुम  चले आना 
... 
भूल जाओ आज  परेशानियाँ तुम 
काँधे पे रख सर अपना  सो जाना 
... 
गैर नही हम तो तुम्हारे है सनम 
पराया समझ हमको न भूल जाना

रेखा जोशी  

वीर शहीद सैनिकों को करते नमन शत शत

चाहा  तुम्हे जान से ज्यादा  ऐ वतन  हमने
किये  पाक  के  नापाक  इरादे  दमन हमने
वीर शहीद सैनिकों को करते नमन शत शत 
बहा  के खून  अपना सींचा यह चमन हमने

रेखा जोशी

Thursday, 22 September 2016

पिया घूँट हमने ज़हर से भरा अब

जहन में भरी गन्दगी आज क्यूँ है 
जहर जिंदगी ये बनी आज क्यूँ है 
....
हमे  ज़िन्दगी से गिला है न शिकवा 
मगर  दर्द से यह  भरी आज क्यूँ है 
.... 
बिखर टूट जाये न सोचा न चाहा  
यहाँ ज़िन्दगी रो रही आज क्यूँ है  
... 
पुकारे किसे हम बुलायें किसे अब 
यहाँ रो रही हर कली आज क्यूँ है 
.... 
पिया घूँट हमने ज़हर से भरा अब 
यहाँ  मौत आती नहीं  आज क्यूँ  है 

रेखा जोशी 





क्यों किया हमसे किनारा चल दिए

था  हमे  तेरा  सहारा चल दिए  
तोड़ कर दिल वो हमारा चल दिए 
... 
रूठ  कर हमसे चले हो तुम कहाँ
बहुत हमने तो पुकारा  चल दिए
....
छोड़ तुमको जी न पायें हम कभी
क्यों किया हमसे किनारा चल दिए 
... 
प्यार हमने है किया तुमसे सजन
कर हमें वो बेसहारा चल दिए
....
दर्द तुमसे है मिला हमको सजन
प्यार का छोड़ा शरारा चल दिए
...
रेखा जोशी



हाल ए दिल दिखाते सजन

है   याद  आती   बार बार
दिल  कर  रहा अब  इंतज़ार  
हाल ए दिल दिखाते प्रियतम 
जो  तुम  आ  जाते  एक बार

रेखा जोशी 




Wednesday, 21 September 2016

अमृत सा उसका पानी

मदमस्त 
स्वच्छ निर्मल धारा 
उतरी धरा पर 
भागीरथी 
इठलाती नवयौवना सी 
हिमालय पर्वत से 
लहराती बलखाती 
रवानी जवानी सी 
उफनती जोशीली 
बहती जा रही 
अमृत सा उसका पानी 
जीवनदायनी 
हो गई मैली धारा 
है धर्म हमारा 
इसे रखना पावन 
बहती रहे सदा 
हमारी धरा पर 

रेखा जोशी 

रहता वह साथ मेरे शाम ओ सहर

ख्यालों को मेरे वह महका रहा है
दूर हो कर भी वह पास आ रहा है
रहता वह साथ  मेरे शाम ओ सहर
तन्हाईयों  को  मेरी  सजा  रहा है

रेखा जोशी

हुए जो शहीद उनको करें हम शत शत नमन

भारत पर वह  मर मिटे नौछावर किये  प्राण
देश  की  खातिर  सीमा  पर  वह हुए   कुर्बान
हुए जो शहीद उनको करें हम शत शत नमन
अपने क़दमों के वह छोड़  चले  गये   निशान

रेखा जोशी 

बेचैन निगाहें

बेचैन निगाहें
जनवरी का सर्द महीना था ,सुबह के दस बज रहे थे और रेलगाड़ी तीव्र गति से चल रही थी वातानुकूल कम्पार्टमेंट होने के कारण ठण्ड का भी कुछ ख़ास असर नही हो रहा था ,दूसरे केबिन से एक करीब दो साल का छोटा सा बच्चा बार बार मेरे पास आ रहा था ,कल रात मुम्बई सेन्ट्रल से हमने हज़रात निजामुदीन के लिए गोलडन टेम्पल मेल गाडी पकड़ी थी ”मै तुम्हे सुबह से फोन लगा रही हूँ तुम उठा क्यों नही रहे ”साथ वाले केबिन से किसी युवती की आवाज़ ,अनान्यास ही मेरे कानो से टकराई,शायद वह उस बच्चे की माँ की आवाज़ थी ,”समझ रहे हो न चार बजे गाडी मथुरा पहुँचे गी ,हाँ पूरे चार बजे तुम स्टेशन पहुँच जाना ,मुझे पता है तुम अभी तक रजाई में ही दुबके बैठे होगे , एक नंबर के आलसी हो तुम इसलिए ही तो फोन नही उठा रहे,बहुत ठण्ड लग रही है तुम्हे ” | वह औरत बार बार अपने पति को उसे मथुरा के स्टेशन पर पूरे चार बजे आने की याद दिला रही थी ,उसकी बातों से ऐसा ही कुछ प्रतीत हो रहा था मुझे | ”हाँ हाँ मुझे पता है तुम्हारा ,पिछली बार तुम चार बजे की जगह पाँच बजे पहुँचे थे ,पूरा एक घंटा इंतज़ार करवाया था मुझे ,इस बार मै तुम्हारा इंतज़ार बिलकुल नही करूँगी , अगर तुम ठीक चार बजे नही पहुँचे तो मै वहाँ से चली जाऊँ गी बस ,फिर ढूँढ़ते रहना मुझे , कहीं भी जाऊँ परन्तु तुम्हे नही मिलूँगी अरे मै अकेली कैसे आऊँ गी ,सामान है मेरे साथ ,गोद में छोटा बच्चा भी है ,आप कैसी बात कर रहे हो | ”ऐसा लग रहा था जैसे उसका पति उसकी बात समझ नही पा रहा हो i उसकी बाते सुनते सुनते और गाड़ी के तेज़ झटकों से कब मेरी आँख लग गई मुझे पता ही नही चला ,आँख खुली तो मथुरा स्टेशन के प्लेटफार्म पर गाड़ी रूकी हुई थी ,घड़ी में समय देखा तो ठीक चार बज रहे थे ,मैने प्लेटफार्म पर नज़र दौड़ाई तो देखा वह औरत बेंच की एक सीट पर गोद में बच्चा लिए बैठी हुई थी और उसकी बगल में दो बड़े बड़े अटैची रखे हुए थे ,लेकिन उसकी बेचैन निगाहें अपने पति को खोज रही थी ,पांच मिनट तक मै उसकी भटकती निगाहों को ही देखती रही ,तभी गाड़ी चल पड़ी और वह औरत धीरे धीरे मेरी नज़रों से ओझल हो गई | मालूम नही उसकी बेचैन निगाहों को चैन मिला या नही , उसका पति उसे लेने पहुँचा या नही ,जो कुछ भी वह फोन पर अपने पति से कह रही थी क्या वह तो सिर्फ कहने भर के लिए था ?
रेखा जोशी

अपने देश की खातिर वह हुये शहीद सीमा पर

रख  हथेली  पर  प्राण  सिपाही तैनात सीमा पर 
अपने देश की खातिर वह  हुये  शहीद  सीमा पर 
छीन लिया जिन्हें हमसे दुश्मन की जालसाज़ी ने 
अपने घर  से बहुत दूर मर मिटे  वीर  सीमा पर 

 रेखा जोशी 

दर्द दिल का अब ज़ुबाँ से नहीं कहा जाता है

बिन तेरे हमसे तो अब नही रहा जाता है 
दर्द दिल का अब ज़ुबाँ से नहीं कहा जाता है 
.... 
या खुदा मेरी उल्फत को तुम जिंदगी दे दे 
गम जुदाई का अब  और नहीं  सहा  जाता है 
...
तडप तडप के गुज़ारी  हमने  हर घड़ी हर पल 
वफा का दीपक अब जल जल के बुझा जाता है 
....
है इंतज़ार और अभी,और अभी और अभी 
पैमाना ऐ सब्र  यहाँ  लब  से छुटा जाता है 
...
रात में यह दिल अब यहाँ तन्हां डूब जाता है 
मायूसियों के आलम में दम घुटा जाता है 
...
रेखा जोशी 

Tuesday, 20 September 2016

दिल में बसते तुम ही तुम हो जब प्रीत हुई तुमसे अपनी

दुर्मिल सवैया [ वर्णिक छंद ]24 वर्ण
दुर्मिल सवैया = सगण X 8  या, ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ ।।ऽ

समझा जबसे  हमने तुमको मिलती नज़रें तबसे  अपनी 
दिल में  बसते तुम ही तुम हो जब प्रीत हुई तुमसे अपनी 
मिलते तुम जो  खिलती रहती बगिया दिल की हमसे अपनी 
अब ढूंढ रही नज़रें तुम को मिल बात कहो  सबसे अपनी 

रेखा जोशी 

Monday, 19 September 2016

क्षमा करें उसे दिल से

गर गलती हो जाये 
किसी से 
क्षमा करें उसे दिल से 
करें हम भी जीवन में 
अपनी
गलतियों को स्वीकार 
माफ़ करने से 
हम करते खुद पर ही 
उपकार 
आओ मिल कर ज़िंदगी में
हम सबसे करें प्यार

रेखा जोशी 

अपमानित घुटन भरी ज़िंदगी

बेटी भारत की
कर गई ज़ख्मी
पूरे देश को
थी वह निर्भया
रही संघर्षरत
हार गई
जंग जीवन की
कानून बदले
हालात बदले
लेकिन
नही बदली मानसिकता
नही बचा पाती
अस्मिता अभी भी
झेल रही कहीं
तेज़ाबी हमले
हो रही शिकार कहीं
खूंखार दरिंदो का
झेल रही पीड़ा
जी रही अभी भी
अपमानित
घुटन भरी ज़िंदगी

रेखा जोशी 


Sunday, 18 September 2016

कैसी हो गई हमारी सन्तान

माँ बाप को सदा प्यारी  सन्तान
दुनिया  से उनकी न्यारी सन्तान
है   नही  पूछते  कुशल  क्षेम  भी
कैसी   हो   गई  हमारी  सन्तान

रेखा जोशी 

Saturday, 17 September 2016

कुहुकती कोयलिया ,अम्बुआ डार पे


खिला खिला उपवन ,पवन चले शीतल
भँवरे करें गुँजन ,  बगिया  बहार पे
फूलों पर मंडराये तितली चुराये  रँग
कुहुकती कोयलिया ,अम्बुआ  डार  पे
गीत मधुर गा  रही  ,डाली डाली झूम रही 
हौले हौले से चलती मदमस्त   हवा
चूम रही  फूल फूल ,लहर लहर  जाये
है रँगीन छटा छाई ,नज़ारे निखार पे

रेखा जोशी 

हो रही बेकरार अब , ख़ुशी की हर लहर

करते प्यार सजन तुम्हे , खुलते नहीं अधर 
तुमसे मै  कैसे कहें  ,जीना अब  दूभर
....
हाथ पकड़ कर हम चलें ,दोनों संग संग
ज़िन्दगी का सजन  बने ,सुहाना फिर  सफर
....
ज़िन्दगी मिल गई सजन ,हमें मिले जो तुम
हो रही बेकरार अब , ख़ुशी की हर लहर
....
महकती  हर कली कली,खिले  अँगना फूल
बाग़ में भँवर गूँजते,  पँछी उड़े  अम्बर 
..... 
देख लिया  सारा जहाँ मिले न हमको तुम 
छुपे हो सजन तुम कहाँ ,ढूंढी  हर डगर 
.... 
चाहत मेरी तुम सजन , तुम्ही हो ज़िन्दगी 
सब सूना तेरे बिना ,सूना अपना घर 

रेखा जोशी 

Friday, 16 September 2016

महिमा तेरी अपरम्पार

महिमा तेरी अपरम्पार
आई   प्रभु   तेरे   द्वार
हाथ  जोड़ शीश झुकाये
सुन  भगवन मेरी पुकार

रेखा जोशी 

मेरा दिल क्या कहता है

बजी  ह्रदय प्रेम   धुन सजन 
सपने   प्रीत  के  बुन  सजन
मेरा   दिल   क्या  कहता  है 
ह्रदय की धड़कन सुन सजन 

रेखा जोशी 

नही अब चाहिये दौलत ज़माने की हमें साजन

1222 1222 1222 1222

शमा जलती रही महफ़िल सजाने आप आयें है
यहाँ अब रात में हमने सजन दीपक जलाये हैं
.... 
चले आये हमारी आज महफ़िल में सनम फिर से
पिया आये हमारे घर सितारे जगमगायें है 
.... 
नही अब चाहिये  दौलत ज़माने की हमें साजन 
मिला जो साथ तेरा प्यार साजन गुनगुनाये है 
.... 
सदा रहना हमारी ज़िन्दगी को आप महका के 
खिला कर फूल आंगन में नज़ारे मुस्कुराये  है 
... 
बहुत ही खूबसूरत है यहाँ पर ज़िन्दगी अपनी 
चले आना सजन मौसम यहाँ हमको  बुलायें है 

रेखा जोशी 

Thursday, 15 September 2016

हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है

सजन मिल आशियाना अब बसाना है
हमें   तो  प्यार  तुमसे  ही  निभाना है 
..... 
नहीं  चाहा कभी  तुम  दूर  हों  हमसे 
बहाना  कर सजन  क्यों  रूठ  जाना है  
.... 
खिली है धूप आंगन में हमारे अब 
सुमन उपवन यहाँ पर अब खिलाना है 
.... 
चलो साजन चलें उस पार हम दोनों 
सजन  दिल  आज दीवाना  हमारा है 
... 
मिली है ज़िन्दगी अब मुस्कुराओ तुम 
हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है 

रेखा जोशी 

जान लो सजन हम तुमसे प्यार करते है

तेरी   चाहत   का   हम   इकरार  करते  है
जान  लो  सजन हम  तुमसे  प्यार करते है
किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी
न   जाने   क्यों    तेरा   इंतज़ार   करते  है 

रेखा जोशी 

बेवफा से वफ़ा नही करते

बेवफा  से  वफ़ा  नही  करते
दर्द  दिल  से जुदा नहीं करते 
.....  
साथ तेरा मिला हमे साजन 
फिर जुदा हो जिया नही करते 
.... 
ज़िन्दगी प्यार चाहिये तेरा 
प्यार करके खता नहीं करते 
.. .. 
चाँद तारे यहाँ उतर आये 
अब ज़मीं से गिला नहीं करते 
.... 
बात दिल की सजन बता दो अब 
हर किसी से कहा नहीं करते  

रेखा जोशी 

Wednesday, 14 September 2016

हिंदी गरीब भाषा

विरिष्ठ लेखक सरदार खुशवंत सिंह के अनुसार ”हिन्दी एक गरीब भाषा है ”| सही ही तो कहा है उन्होंने,हिंदी सचमुच गरीबों की ही भाषा है,यह सोच कर सुधीर बहुत दुखी था ,सरकारी स्कूल और सरकारी कालेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद सुधीर ने कई कम्पनियों में इंटरव्यू दिए पर असफलता ही हाथ लगी ,ऐसा नही था की वह बुद्धिमान नही था ,याँ वह वह होनहार नही था ,वह बहुत प्रतिभाशाली था लेकिन अंग्रेज़ी भाषा को ले कर उसका आत्मविश्वास बुरी तरह से आहत हो चुका था ,डगमगा चुका था ,हिंदी भाषी संस्थानों से पढाई करने के बाद जब उसने बाहरी दुनिया में कदम रखा तो अंग्रेजी भाषा में संवाद स्थापित करने में असमर्थ सुधीर हीन भावना का शिकार होने लगा|

 सुधीर ही क्यों हमारे देश में आधी से ज्यादा जनसंख्या हिंदी भाषी है एवं हिंदी भाषी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करती है और वह सभी लोग अंगेजी बोलने वालो के सामने अपने को तुच्छ और हीन समझने लगते है वह इसलिए क्योंकि हिंदी भाषा को हेय दृष्टि से देखा जाता है ,हिंदी के प्रति यह सौतेला व्यवहार ,आखिर क्यों ,जो हिंदी बोलते है उन्हें क्यों गंवार समझा जाता है और जो अंग्रेजी में प्रतिभाशाली करते है उन्हें इज्ज़त से देखा जाता है जबकि हिंदी हमारे भारत की राज भाषा है हमारी अपनी मातृ भाषा है ,परन्तु आज हिंदी गरीबों और अनपढ़ों की भाषा बनकर रह गई है ,केवल अंग्रेजी ही पढ़े लिखों की भाषा मानी जाती है | 

इन सारी बातों ने सुधीर को झकझोर कर रख दिया था ,आज़ादी मिलने के छ्यासठ वर्ष बाद भी हम आज तक अंग्रेजी के गुलाम बने हुए है ,कब तक सुधीर जैसे अनेक नौजवान अपने ही देश हिन्दुस्तान में हिंदी की वजह से पिछड़े हुए कहलाते रहें गे | यह इस देश का दुर्भाग्य है कि किसी सरकारी स्कूल के विद्यार्थी और पब्लिक ,प्राइवेट और अन्य अंग्रेजी भाषी स्कूल के विद्यार्थी का एक जैसा पाठ्यक्रम होने पर भी हिंदी भाषी सरकारी स्कूल के छात्र अंग्रेजी भाषी स्कूल के छात्रों से सदा पिछड़े हुए रहते है ,इसी कारण अब मध्यमवर्गीय परिवार के लोग तो क्या निर्धन परिवारों के लोग भी अंग्रेज़ी भाषी स्कूलों में अपने बच्चो को शिक्षित करना चाहते है ,चाहे उन्हें उसके लिए अपना पेट काट कर क्यों न रहना पड़े | हमारे भारत की तीन चौथाई जनसंख्या गाँवों में रहती है जहां या तो स्कूल न के बराबर होते है अगर है तो सिर्फ हिंदी भाषी जिनका अंग्रेजी भाषा से दूर दूर तक कोई सरोकार नही होता ,ऐसे में आज के नौजवान, युवा वर्ग इस देश की भविष्य नीधि जब अंग्रेज़ी भाषा के सामने हीन भावना से ग्रस्त रहेगी तो इस देश के भविष्य का क्या होगा ?

रेखा जोशी 

आने से तेरे बगिया खिलखिलाने लगी

बरसों  से थी तेरी  वह  इंतज़ार तुम हो
मेरी ज़िन्दगी में लाई वह प्यार तुम हो
आने से तेरे बगिया  खिलखिलाने लगी
मेरे अँगना को महकाती   बहार तुम हो

रेखा जोशी

Tuesday, 13 September 2016

हिंदी ब्लागिंग [हिंदी दिवस पर ]

हिंदी ब्लागिंग [हिंदी दिवस पर ]

अंग्रेजी में स्नातक होने पर भी मनु ने हिंदी में ब्लॉग लिखने शुरू कर दिए ,वह इसलिए कि हिंदी हमारी अपनी मातृ भाषा है और इस कारण हम अपने विचारों को बहुत ही सुगमता से अभिव्यक्त कर सकते है ,यह विचार ही हैं जो समाज को प्रभावित कर उसे एक नई  दिशा दे सकते है । हिंदी भाषा ही एक ऐसी भाषा है जो भारतवासियों  को आपस  में जोड़ सकती है ।अपने  विचारों को मनु हिंदी में समाजिक सरोकार से जुड़े हुए विषयों पर ब्लॉग लिख  कर इंटरनेट से  विभिन्न मंचों  पर पोस्ट करने लगा । जैसा कि हम सब जानते है, आजकल इंटरनेट का जमाना है ,जिसने पूरी दुनिया की दूरियों को नजदीकियों में बदल दिया है । पूरे विश्व में दूर दराज़ बैठे हुए लोगों से क्षण भर में ही संपर्क स्थापित किया जा सकता है ,एक दूसरे के विचारों का आदान प्रदान भी किया जा सकता है ।
मनु के ब्लॉग'स को केवल भारत में ही नही दुनिया के कई देशों में भी पढ़ा और सराहा जाने लगा है  ,उसकी पोस्ट पर कभी अमरीका से कमेंट्स आते है तो कभी रूस से यां जर्मनी से ,कनाडा ,अबूधाबी,पोलैंड ,स्वीडन सारे के सारे देश सिमट कर  मनु के ब्लाग्स की साईट पर आ गए | उनकी प्रतिक्रियाएं पढ़ कर मनु के चेहरे पर चमक आ जाती है ,हिंदी भाषा में लिखे गए ब्लॉगस को केवल भारत में नही पूरी दुनिया में पसंद किया जा रहा है| इंटरनेट ,फेस बुक,गूगल के इस नव  दौर में हिंदी, भारत के जनमानस की भाषा ,न केवल दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है  बल्कि  दिन प्रति दिन  इसका रूप निखर कर आ रहा है |एक तरफ तो हिंदी भाषा में ब्लागिंग सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर हो रही है और दूसरी तरफ हमारे भारतीय संस्कृति भी दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है |
जहाँ हिंदी भाषा ही लुप्त हो रही थी वहीँ अब हिंदी साहित्य में लुप्त हो रही काव्य  छंद विधा नव परिवर्तनों के आज के इस दौर में फिर से उभर कर आ रही है ,हिंदी साहित्य में रूचि  रखने वाले न केवल इस विद्या के रस का आनंद उठा रहे है बल्कि इसे जी जान से सीखने का भरसक प्रयास भी कर रहें है |आजकल मनु  जैसे हजारों ,लाखों ब्लागर्स  हिंदी में ब्लागिंग कर रहे है | कई ब्लागर्स  ब्लागिंग से अपनी हाबी के साथ साथ आर्थिक रूप से भी सम्पन्न भी हो रहे है | आज मनु को अपने फैसले पर गर्व है कि उसने बदलते हुए इस नयें दौर में अपने विचारों कि अभिव्यक्ति के लिए हिंदी ब्लागिंग को चुना | इसमें कोई दो राय नही है कि नव परिवर्तनों के इस  दौर में एवं आने वाले समय में हिंदी ब्लागिंग का भविष्य उज्जवल है |

रेखा जोशी 

मिलाया हम सभी को कुदरत ने

है  वाकिफ  हम तेरी फितरत से
मत बोना कभी  बीज नफरत के
नहीं  चाहते  हम  तुम को  खोना
मिलाया हम सभी  को कुदरत ने
.....
सदा प्रीत अपने दिल से निभाना
धोखा नही  कभी  प्यार  में खाना
चलो  इक  दूजे  में  खो जाये  हम
है  इक  दूजे  को  अब  हमे  पाना
....
रेखा जोशी

Monday, 12 September 2016

सुन आज प्यार की धुन

छंद  ईश
112 121 22

यह ज़िन्दगी हमारी 
हमने   यहाँ  सँवारी  
थमना नहीं कभी तुम 
चलते   रहे सदा  हम 
.... 
सपने   यहाँ   कभी  बुन 
सुन आज प्यार की धुन 
मनमीत     पास    तेरा 
मत  छोड़  साथ    मेरा  

रेखा जोशी 






Sunday, 11 September 2016

जो न आई घर हमारे रौशनी कैसे कहूँ

"""" नव सृजन '"""
****************
बह्र (अरक़ान) : फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन
तक़्तीअ : २१२२..२१२२..२१२२..२१२

2122 2 122 2122 212 

जो न  समझे दर्द उसको आदमी कैसे कहूँ 
जी सके हम जो नही वह ज़िंदगी कैसे कहूँ 
…… 
आसमाँ पर चाँद निकला हर तरफ बिखरी किरण 
जो   न  उतरे   घर   हमारे   चाँदनी    कैसे   कहूँ 
...... 
मुस्कुराती हर अदा तेरी सनम जीने न दे 
हाल  अपने  की  हमारे   बेबसी कैसे कहूँ 
…… 
राह मिल कर हम चले थे ज़िंदगी भर के लिये 
मिल सके जो तुम न हम को वह कमी कैसे कहूँ 
…… 
हो  गया रोशन जहाँ जब प्यार मिलता है यहाँ 
जो न आई घर हमारे रौशनी कैसे कहूँ 

रेखा जोशी