Saturday, 4 March 2017

दो स्वेच्छिक मुक्तक

है याद मिले तुम  हमें पहले पहल चाँदनी रात में
खामोश लब बोले नयन ह्रदय विहल चाँदनी रात में
थामा था हाथ इक दूजे का निभाने के लिये साथ
जगमगा उठा कल्पनाओं का महल चाँदनी रात में
......
प्यार तुमको जिंदगी करना न आया है 
जी रहे हम ज़िन्दगी पर कुछ न भाया है
लाख समझाया न माना दिल हमारा  यह 
ता उमर इस ज़िन्दगी ने बस सताया है

रेखा जोशी