Saturday, 4 March 2017

जीने की राह

एकांकी

""जीने की राह"

कलाकार
पहला,दूसरा(सूत्रधार) मसखरे
अजय
प्रेरणा  अजय की पत्नी

स्टेज पर दो मसखरों का प्रवेश

पहला, जब मैं छोटा बच्चा था
दूसरा,बड़ी शरारत करता था,और मेरी माँ मुझे बहलाने के लिए नई नई कहानियां सुनाया करती थी
पहला, अच्छा,मुझे भी सुनाओ न कहानी
दूसरा ,हां  एक कहानी याद आई,एक राजा था , वह बहुत दुखी था
पहला ,क्यों दुखी था
दूसरा ,अपने पड़ोसी राजा से बार बार युद्ध में हार जता था न
पहला ,अच्छा ,फिर क्या हुआ
दूसरा ,अपनी पराजय से दुखी वह अपने बिस्तर पर लेटा कुछ सोच रहा था क़ि अचानक उसकी नज़र कमरे की छत पर लटकती हुई मकड़ी के जाले  पर पड़ी
पहला जले पर,अच्छा फिर क्या हुआ
दूसरा ,उसने देखा मकड़ी बार बार नीचे गिरती है ,फिर ऊपर उठती है
नीचे ऊपर ,ऊपर नीचे
पहला, क्या बोलते जा रहे हो ऊपर नीचे ,नीचे ऊपर
दूसरा,है वो राजा मकड़ी की अनथक मेहनत देख कर हैरान हो गया
दूसरा,अरे ,इसमें हैरान हो  की क्या बात है
पहला,यही तो बात है बार बार नीचे गिरने पर भी मकड़ी ने हिम्मत नही हारी,और अंत में वह अपनी ।नाजिल पर पंच ही गई
दूसरा,इसे देख हारे हुए राजा में फिर से उत्साह भर आया
पहला ,और उसने अपने पड़ोसी राज्य पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की
दूसरा ,यह कहानी सिर्फ एक राजा की नही है,यह कहानी मेरी ,आप्किया हम सबकी हो सकती है
पहला,जीने की राह चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो ,
दूसरा,राही वही सफल होता है जो अपनी मंजिल पा जाता है
पहला ,ठीक वैसे ही जैसे इस कहानी का नायक ""अजय""
दूसर,तो आइये सुने अजय की कहानी
पहला अजय की जुबानी

स्टेज पर अजय और उसकी पत्नी प्रेरणा का प्रवेश

प्रेरणा ,अजय मुझे तुम पर गर्व है क़ि मै तुम्हारी पत्नी हूँ,तुम्हारा तो नाम ही अजय है जिसने जीवन में हारना सीखा  ही नही

अजय , हां प्रेरणा मेरी ज़िंदगी संघर्ष की एक लंबी दास्ताँ है,बचपन क्या होता है मैंने देखा ही नही ,पांच वर्ष की आयु में सर से बाप का साया उठ गया ,गरीबी क्या होती है मुझ से पूछो

प्रेरणा ,लेकिन आज तो तुम्हारे पास सब कुछ है

अजय,हा ,आज मेरेपास सब कुछ है ,लेकिन इस सब के पीछे छिपे है इक लम्बा  रास्ता ,गाँव की टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों से मीलों दूर स्कूल का रास्ता,स्कूल से कालेज और कॉलेज से यूनिवर्सिटी का रास्ता
बच्चों को ट्यूशन देना ,घर का खर्चा  ,विधवा माँ की देखभाल और छोटे भाई की पढ़ाई का खर्चा

प्रेरणा, जानती हूँ तुमने कभी हिम्मत नही हारी ,ज़िन्दगी में अपने को टूटने नही दिया

पहला हा, हिम्मते मर्द ,मददे खुदा
दूसरा ,भगवान उनकी मदद करते है जो अपनी मदद खुद करते है
पहला ,जीवन एक चुनौती है
दूसरा चुनौती का स्वागत करो
पहला ,जीवन एक संघर्ष है
दूसरा संघर्ष का स्वागत करो
पहला ,खुदी को कर बुलन्द इतना
दूसरा,कि खुदा बन्दे से यह पूछे
दोनों बता तेरी रज़ा क्या है

रेखा जोशी