Thursday, 13 April 2017

निष्ठुर कैसा है साजन यह तुम्हारा मन

करता सदा याद प्रियतम तुम्हे प्यारा मन
तुमसे मिलने  को मचल  उठा हमारा मन
,
आ भी जाओ सजन अब औऱ न तड़पाओ
कब तक भटकोगे लिये तुम आवारा मन
,
बैठे  हम  राह  में  अपने  नैन  बिछाये
निष्ठुर कैसा है साजन यह तुम्हारा मन
,
टूट जायेंगे हम  अगर  की   बेवफाई
अब प्यार तेरे में साजन यह हारा मन
,
थके नयन हमारे इंतज़ार में  प्रियतम
आँसू बहा अब हार  गया बेचारा मन

रेखा जोशी