Wednesday, 10 May 2017

तकदीर  से  मिले  तुम  तो  ज़िंदगी  मिली है 

जब  छा  गया  उजाला  तो  रोशनी  मिली  है 

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खिल खिल गये यहाँ पर उपवन महक उठे तब 

बगिया   महक उठी  अब हमको  ख़ुशी मिली है 

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झूले  पड़े  यहाँ  पर  अब  याद  आ  गये  तुम 

राहें  यहाँ   सँवारे   कलियाँ   बिछी   मिली  है 

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नभ   पर   उड़   रही  हूँ   आकाश   छोड़  पीछे 

रहगुज़र   है  जहाँ  पे  अब   वो  गली  मिली है 

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तुम  जो हमे  मिले हो  हम को मिला जहाँ अब 

यह  आसमाँ   हमारा   हमको  धरा   मिली  है 

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रेखा जोशी