Tuesday, 23 May 2017

ग़ज़ल


बहरे- मुतकारिब मुसमन सालिम
अर्कान= फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
तक़्तीअ= 122, 122, 122, 122

तिरा प्यार जब से हमारा हुआ है
सफर ज़िन्दगी का सुहाना हुआ है
,
कहानी कहे आज सारा जहाँ यह
किया आज इकरार चर्चा हुआ है
,
मिला साथ तेरा खिली अब बहारें
यहाँ बाग में फूल महका हुआ है
,
करो तुम सजन प्यार की आज बातें
यहाँ दिल हमारा दिवाना हुआ है
,
निभाना सदा साथ ना छोड़ जाना
तिरे ही लिये खास  आना हुआ है

रेखा जोशी