Thursday, 4 May 2017

है कर्म ही ध्येय तुम्हारा

आये कहाँ से दुनिया मे
मालूम नही
जायेंगे कहाँ दुनिया से
मालूम नही
है जीवन कर्मक्षेत्र हमारा
जन्म मरण के बीच
कर्म की महिमा को जान
कर्म सुख की खान
कर्मयोगी बन
करता चल पुरुषार्थ
कहा कृष्ण  ने अर्जुन से
है कर्म ही ध्येय तुम्हारा
कर त्याग फल की इच्छा का
अर्पित कर सब कर्म मुझे
रख खुद पर विश्वास
बोया जब पेड़ बबूल का
फिर क्यों आम की आस
जैसा कर्म करोगे तुम
लौट वही आयेगा
फिर तुम्हारे पास

रेखा जोशी