Saturday, 17 June 2017

महालक्ष्मी 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद
212 212 212

साथ तेरा मिला जो पिया
आज लागे नहीं  है जिया
पास  आओ  हमारे अभी
काश आ के न जाओ कभी
....
देख के रूप तेरा पिया
चाँद भी आज शर्मा गया
रात को रौशनी है मिली
मीत मै  संग तेरे चली
....
है ख़ुशी आज गाते  रहें
ज़िन्दगी जाम पीते रहें
प्रीत को  तोड़ जाना नही
छोड़ना साथ आता नही
,
बाग में अब कली है खिली
जिंदगी में   खुशी है  मिली
साथ  तेरा  हमें  जो  मिला
ज़िन्दगी से नही अब गिला
,
प्यार अब ज़िन्दगी से मिला
अब चलेगा यही सिलसिला
मीत  आये  यहां   ज़िन्दगी
गीत  गाये  यहां    ज़िन्दगी

रेखा जोशी