Saturday, 10 June 2017

आधार छंद सुमेरु

आधार छंद - सुमेरु
मापनी - 1222 1222 122

समांत - आना <> पदांत - आ गया है

हमें भी मुस्कुराना आ गया है
पिया से दिल  लगाना आ गया है,
,
चली ठंडी हवायें अब यहाँ पर
हमें भी  गुनगुनाना आ गया है
,
मिले जो तुम मिला सारा जहाँ अब
यहाँ मौसम सुहाना आ गया है
,
खिला उपवन  यहां गाती फ़िज़ाये
बहारों का ज़माना आ गया है
,
बंधी  है प्रीत की यह आज डोरी
उन्हें अपना बनाना आ गया है

रेखा जोशी