Wednesday, 20 December 2017

सर्दी का आलम


छोड़ रजाई बिस्तर से उठने का नहीं था मन
सुबह सुबह नींद खुली सुन कर अलार्म की टन टन
,
हाथ निकाला रजाई से  कर के बंद अलार्म
दुबके बिस्तर में बजी फिर अलार्म की टन टन
,
कड़ाके की ठंड में बिस्तर लगे बहुत प्यारा
क्या करे अच्छी लगती न पर अलार्म की टन टन
,
उठने को हम जब भी हुए खींचे बिस्तर हमें
सोयें केसे हम बजे गर अलार्म की टन टन
,
हुई भोर छोड़ना ही होगा मखमली बिस्तर
गूंज उठा आवाज सुन घर अलार्म की टन टन

रेखा जोशी

कड़ाके की ठंड में बिस्तर लगे बहुत प्यारा
उठने को जब भी हुए खींचे बिस्तर हमारा