Thursday, 31 May 2018

देखते ही देखते ज़िन्दगी गुज़र गई

देखते ही देखते
ज़िन्दगी गुज़र गई
.
वही  है धरती
आसमां भी वही
वक्त के साथ
तस्वीर अपनी बदल गई
.
कभी-कभी
देखते हैं मुड़ के पीछे
क्या खोया क्या पाया
ज़िन्दगी में हमने
दिखाई देती है कुछ
धुंधली सी परछाइयाँ
याद आते ही
आँखे नम हो गई
.
था सुहाना बचपन
बेफिक्र मौज मस्ती का आलम
कब आई जवानी कब बीता बचपन
हवा के झोंके सी उम्र निकल गई
.
देखते ही देखते
ज़िन्दगी गुज़र गई

रेखा जोशी