Wednesday, 4 July 2018

नभ पर बादल गरजते ,घटा घिरी घनघोर

भीगा सा मौसम यहाँ  ,भीगी सी है रात ।
भीगे अरमान  लेकर ,आई है बरसात
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नभ पर बादल गरजते ,घटा घिरी घनघोर
रास रचाये दामिनीे  ,मचा  रही  है शोर ॥
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आँचल लहराये हवा , ठंडी पड़े फुहार |
उड़ती जाये चुनरिया ,बरखा की बौछार ||
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कुहुक रही कोयल यहाँ, अम्बुआ डार डार l      
हरियाली छाई रही, है चहुँ ओर बहार ll
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सावन बरसा झूम के ,भीगा तन मन आज ।
पेड़ों पर झूले पड़े ,बजे मधुर है साज़
                        
रेखा जोशी