Monday, 12 February 2018

रंग अपने है दिखाये ज़िन्दगी तुमने

छन्द--'रजनी'
2122 2122 2122 2

गीतिका

रंग अपने है दिखाये ज़िन्दगी तुमने
राह में कांटे बिछाये ज़िन्दगी तुमने
,
चोट खाते ही रहे परझर रहा जीवन
फूल उपवन ना खिलाये ज़िन्दगी तुमने
,
है अँधेरी रात साथी भी नहीं कोई
दीप कोई ना जलाये ज़िन्दगी तुमने
,
ज़िन्दगी तुम फिर कभी तो मुस्कुराओगी
आस का पंछी बुलाये ज़िन्दगी तुमने
,
भूल ऐसी क्या हुई हमसे बता भगवन
शूल जीवन भर चुभाये ज़िन्दगी तुमने

रेखा जोशी

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