Tuesday, 26 March 2019

दर्द दिल ही दिल में छिपाते रहे

मुस्कुराते रहे गीत गाते रहे
दर्द दिल ही दिल में छिपाते रहे
..
साथ जिंदगी का निभाया हमने
दुखों  को  ही साथी  बनाते रहे
...
प्रीत मांगी थी सजन तुमसे कभी
आंसुओं  से  नेह  बरसाते  रहे
...
किया हमने किनारा तुमसे पिया
अपनी ही धुन में  मुस्काते रहे
..
छोड आये हम तो गलियाँ तेरी
याद फिर क्यों  हमें तुम आते रहे

रेखा जोशी

10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरूवार 4 अप्रैल 2019 को साझा की गई है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर आभार आपका 🙏 🙏

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    1. Meena जी सादर आभार आपका 🙏

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  3. वाह!!!
    बहि सुन्दर...

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    1. शुक्रिया सुधा जी

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