Sunday, 20 October 2019

जिंदगी

माना दर्द भरा संसार यह ज़िंदगी

लेकिन फिर भी है दमदार यह ज़िंदगी
,
आंसू  बहते  कहीं  मनाते जश्न  यहां
सुख दुख देती हमें अपार यह ज़िंदगी
,
रूप जीवन का बदल रहा पल पल यहां
लेकर नव रूप करे सिंगार यह जिंदगी
,
ढलती शाम डूबे सूरज नित धरा पर
आगमन भोर का आधार यह ज़िंदगी
,
चाहे मिले ग़म खुशियां मिली है हज़ार
हर्ष में खिलता हुआ प्यार यह ज़िंदगी

रेखा जोशी

5 comments:

  1. जिंदगी के जाने कितने ही रंग होते हैं
    बहुत सुन्दर
    शुभ दीपावली!

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  2. धन्यवाद कविता जी, दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-10-2019) को    "आम भी खास होता है"   (चर्चा अंक-3497)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  4. चाहे मिले ग़म खुशियां मिली है हज़ार
    हर्ष में खिलता हुआ प्यार यह ज़िंदगी..
    यह अच्छी रचना चर्चामंच पर सुबह-सुबह पढ़ मन प्रफुल्लित हो गया।

    आपकी लेखनी को नमन।

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