Sunday, 19 April 2020

रेलगाड़ी

चलती ही जा रही रेलगाड़ी
जीवन के सफर की 
उतर जाते सभी अपने अपने 
पड़ाव  के आने पर 
आ जाते मुसाफिर भी नए नए 
और फिर 
चलती ही जा रही रेलगाड़ी 
हो जाते हैं झगडे भी कभी कभी 
मिलजुल कर रहते हैं कभी कभी 
लेकिन रुकती नही रेलगाड़ी 
पहुँचा ही देती है हर किसी को 
उसके पड़ाव पर 

रेखा जोशी 


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