Wednesday, 27 May 2020

डोलती रहेगी जीवन नैया


समुद्र तट के बैठ किनारे 
सुन रहीं हूँ शोर 
आती जाती, उठती गिरती
लहरों का 
डोलती रहेगी जीवन नैया भी 
सुख दुख की लहरों पर 

आगे पीछे, झूम रही 
मदमस्त लहरे 
जैसे झूले पवन संग झूले 
आगे पीछे 
क्या है जीवन हमारा 
झूलता ही रहता है सदा 
सुख और दुख की लहरों पर 

सूरज चूम रहा
सागर का आंचल 
रंग सिंदूरी चमक रहा 
आसमां भरा गुलाल 
ढलती है शाम 
फिर होगी सुबह होगा नव नाम 
और जीवन  ऐसे ही 
चलता  रहेगा 
सुख दुख की लहरों पर 

रेखा जोशी 

6 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार(३०-०५-२०२०) को 'आँचल की खुशबू' (चर्चा अंक-३७१७) पर भी होगी
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का
    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    **
    अनीता सैनी

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर आभार आपका 🙏

      Delete
  2. हृदयग्राही रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर आभार आपका 🙏

      Delete
  3. सत्य को स्वीकारती रचना।

    ReplyDelete
  4. सादर आभार आपका 🙏

    ReplyDelete