Monday, 20 September 2021

राही चल अकेला

गीत

राही चल अकेला

आया है सो जाएगा

अजब प्रभु का खेला

अकेला, राही चल अकेला

सुख दुख की ये जीवन राहें

कर ले जो तू करना चाहे

है जीवन दो दिन का मेला

अकेला,राही चल अकेला

बहती जाए वक़्त की धारा

वक़्त से हर कोई हारा

रुके नहीं समय का रेला

अकेला, राही चल अकेला

राही चल अकेला

राही चल अकेला

रेखा जोशी

5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 21 सितम्बर 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुंदर सार्थक रचना ।

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  3. बहुत सुन्दर

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