Ocean of Bliss
Friday, 31 January 2014

चार दिन की चांदनी

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लुभाती हम सभी को  सुन्दर सलोनी है काया  लेकिन  देखो तो वक्त की यह कैसी है माया  सुन्दर से सुन्दर देह भी आखिर जाती है ढल  चार  दि...
Wednesday, 29 January 2014

वृक्ष हूँ मै

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बहुत बड़ा वृक्ष हूँ मै खड़ा हूँ सदियों से यहाँ बन द्रष्टा देख रहा हूँ हर आते जाते मुसाफिर को करते है विश्राम कुछ पल यहाँ और फिर च...

कौन समय के आगे टिक पाया

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यह   संसार   बनाने    वाले  हे कैसा   है   यह   संसार  बनाया फूलों   के   संग    उगाये   कांटे औ  धूप  के  साथ  बनाई छाया है प्यार  बना...
Tuesday, 28 January 2014

ठान ली है ज़िद इस दिल ने भी

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पत्थर के  सनम से  जोड़ा रिश्ता  चकनाचूर हुआ शीशे सा दिल अपना पर नही मानता यह दिल जानता है वह खिला देगा इक दिन फूल भी पत्थरों में महका सकता ह...

पाषाण चट्टानों में खिला सकते है फूल

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दिल लगा कर पत्थर से हम जाते है भूल  खाते  अक्सर  चोट   जैसे  चुभते   है शूल  लेकिन हमारे  मन में है  विशवास इतना  पाषाण  चट्टानों  मे...
Monday, 27 January 2014

मान और शान तिरंगे की

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जान  हथेली पर  रख सर  कटाने को तैयार है  देश अपने की खातिर मर  मिटने को तैयार है  परिवार अपने से मीलों  दूर तैनात  सीमा पर  मान और शान ...

ओम की गूँज

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ओम की गूँज  भंग होती नीरवता गुंजित हुआ ब्रह्मांड आँखे मूंदे धरा पर समाधिस्थ योगी विलीन ओम में विचर रहा दूर कहीं एकरस उसमे झांक रहा उस पार आ...
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