Ocean of Bliss
Friday, 29 August 2014

समायें तुझ में हम जैसे जलधार सागर में

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जैसे मिले जल नदिया का आपार  सागर में  खो देता मिल कर नीर भी आकार  सागर में  एकरस हो  जायें हम भी मिले जब ईश तुमसे  समायें  तुझ में ह...
Thursday, 28 August 2014

क्षणिकाएँ

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क्षणिकाएँ  1  ओ पंछी  छोड़ पिंजरा  भर ले उड़ान  नील गगन में  सांस ले तू उन्मुक्त खुली हवा में  तोड़ बंधन  फैला कर पँख  ज़मीं...
Wednesday, 27 August 2014

सजन फ़रयाद अब सुन लो हमारी तुम जहाँ भी हो

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कहाँ हो अब  पुकारे हम सदा तुम को यहाँ जानम  बिना  तेरे  ज़माने   में  अकेले  हम  यहाँ   बालम  सजन फ़रयाद अब सुन लो हमारी तुम जहाँ भी हो  ...

लगता है हर पल कहीं छूट सा रहा जैसे

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न  जाने  क्यों  बेचैन  आज मन  मेरा  ऐसे  यूँ  तो  किसी  से कोई  गिला  न शिकवा  वैसे  न जाने यह कैसी  तड़प  है आज इस दिल में लगता  है  हर...

मेरा अंगना [शीर्षक]

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आज शानो अपने परिवार के साथ बहुत खुश थी ,महक रहा था उसका छोटा सा अंगना और उसे सुगन्धित किया था उसकी बेटियों ने , कुसुम और सुमन जो हर मुश...
Tuesday, 26 August 2014

वीरान है यह दिल बिन तुम्हारे

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पतझड़ सा वीरान है यह दिल  बिन तुम्हारे है मालूम  नही आओ गे तुम  न जाने    इंतज़ार  फिर भी क्यों  हमे है तुम्हारा सुन रही तड़प म...

खुश थे हम जीवन में अकेले ही

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तोड़ कर दिल हमारा गया कोई  आस जीने की मिटा  गया कोई  खुश थे हम जीवन में अकेले ही  अरमान दिल के जगा गया कोई  रेखा जोशी 
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