Thursday, 30 April 2015
जलजला आया [अलिवर्णपाद छंद]
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गिरते पहाड़ कांपती धरती अधर में प्राण डोलता संसार जलजला आया त्रासदी त्रासदी रेखा जोशी
त्रासदी त्रासदी
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कुपित हुई धरा मच गया हाहाकार कांपे पर्वत टूटे पहाड़ धराशाही हुये ऊँचे भवन मीनार अधर में फंसे सबके प्राण मचा शोर चहुँ ओर त्रासदी त्रासद...
है गर्मी आई [सदोका]
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है गर्मी आई रसीले तरबूज खरबूजे अमृत सूर्य नभ पे लथपत पसीना अंगार बरसता रेखा जोशी
हाथ मेरा तुम पकड़ भी लो अगर तो क्या
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ज़िंदगी भी होश अब खोने लगी साजन हसरते भी बोझ बन रोने लगी साजन हाथ मेरा तुम पकड़ भी लो अगर तो क्या ज़िंदगी की शाम अब होने लगी ...
आज मौसम आशिकाना आ गया
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प्यार तुमको अब निभाना आ गया रफ़्ता रफ़्ता मुस्कुराना आ गया .... छेड़ कर ज़ुल्फ़ें हवाओं ने कहा आज मौसम आशिकाना आ गया .... ...
Wednesday, 29 April 2015
यहाँ पर पर्वतों को भी गलते देखा
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यौवन को यहाँ हमने ढलते देखा लोहे को भी हमने पिघलते देखा रह जाती शेष बस माटी ही माटी यहाँ पर पर्वतों को भी गलते देखा ...
जी रहे सीने लगा कर दर्द हम अपने सजन फिर
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अब सजन रोये बहुत हम बिन रहे तेरे सजन फिर लाख माँगा प्यार तुमसे प्यार ना जाने सजन फिर .. हाल तुम जानो नही जब मत कहो है प्यार तुमसे नास...
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