Tuesday, 8 December 2015
दया हम माँगते तेरी सदा भगवन यहाँ पर
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ख़ुशी पाई जहाँ में आज हमने बंदगी में खुदा का फ़ज़्ल है जो आप आये ज़िंदगी में .. मिले जो तुम हमे हम को मिला सारा जहाँ अब करम हम पर न...
Monday, 7 December 2015
मुस्कुरा कर चाँद भी अब उतर आया ज़मीन पर
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खूबसूरत मौसम देख दिल दीवाना हो गया शमा की दीवानगी पर दिल परवाना हो गया मुस्कुरा कर चाँद भी अब उतर आया ज़मीन पर प्...
Sunday, 6 December 2015
लम्बी होती परछाईयाँ [पूर्व प्रकाशित रचना ]
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लम्बी होती परछाईयाँ दिला रही एहसास शाम के ढलने का उदास हूँ पर शांत ज़िंदगी की ढलती शाम आ रही करीब धीरे धीरे लेकिन ...
अपनी प्रतिभा से सबको मिलती पहचान
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है देखा देखी से कब बनती पहचान देख अपने गुणों को कर अपनी पहचान है जो क्षमता तुम मे किसी और में नही अपनी प्रतिभा से सबक...
दीप हूँ मै
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हाँ दीप हूँ मै प्रज्वलित हो कर भरता हूँ मै उजाला जहाँ रहता घना अँधेरा रोशन कर वहाँ लाता हूँ मै खुशियाँ दीप ज्ञान का तुम जलाओ इक द...
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हाइकु [सर्दी पर ] सर्द हवायें ठिठुरता बदन होंठ कांपते ........ जला अलाव बीच सड़क पर सेंकते हाथ ...... गिरती बर...
Friday, 4 December 2015
कैसा मच रहा हाहाकार
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जल जीने का जहाँ आधार किया उसने अब यहाँ प्रहार है करी तहस नहस ज़िंदगी कैसा मच रहा हाहाकार रेखा जोशी
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