माथे सजाई बिंदिया चाँद का दीदार किया
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तुझसे ही है प्रियतम सब रंग मेरे जीवन के
प्रार्थना तेरे लिए रब से सौ बार किया
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जीवन में सजन आए मेरी ज़िन्दगी संवारी
सजाये सपनें मैंने तुमने ही साकार किया
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जन्म जन्म के साथी मेरे साजन तुम्हीं तो हो
हर जन्म तुमसे तो मैंने ही प्यार किया
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आती रहें खुशियाँ साजन हमारे अँगना
जीवन अपना सारा तुम पे ही निसार किया
रेखा जोशी
बहुत सुंदर
ReplyDeleteआपकी पंक्तियों में प्रेम, समर्पण और अपनापन बहुत सहजता से झलकता है। सोलह श्रृंगार से लेकर जीवन भर साथ निभाने की भावना तक हर भाव दिल को छूता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
ReplyDeleteअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!