Thursday, 30 May 2013

दास्तान ए मुहब्बत

दास्तान ए मुहब्बत


दूर जा गिरा  कहीं  जाम ए उल्फत
लब पे आते ही हाथो से फिसल कर
दास्तान ए मुहब्बत अधूरी  रह  गई
जो चले गए तुम हमे तन्हा छोड़ कर
....................................................
हमारे प्यार की जिंदगी थी तुम्ही से
क्यूँ छोड़ दिया डूबने मंझधार में हमे
तकते  रहे हम अधखुली निगाहों से
और तुम कश्ती में सवार चलते बने
.....................................................
 न कोई शिकवा न शिकायत तुमसे
 तुम पे ही यह दिल वार दिया हमने
आईना मुहब्बत का धुंधला  सा गया
देखी थी कभी तस्वीर ए यार जिसमे


ईमान है पैसा

ये कहाँ जा रहे है हम
बंद आँखों से किसके पीछे
तोड़ते रिश्ते छोड़ते संस्कार
ठोकर में हैअब धर्म ईमान
लहू दौड़ता रगों में जो
बनता जा रहा वह  पानी
न माँ अपनी न बाप अपना
खून के प्यासे  भाई भाई
उड़ गई महक प्यार की
सुनाई देती खनक पैसे की
प्यार है पैसा ईमान है पैसा
बस पैसा ,पैसा और पैसा



Tuesday, 28 May 2013

नारी सशक्तिकरण, हमारे धर्म का आधार

नारी सशक्तिकरण, हमारे धर्म का आधार

 घनी झाड़ियों में छुपे वह छ पुरुष थे और वह अकेली लड़की ,वो रो रही थी ,चिल्ला रही थी लेकिन उन वहशी दरिंदों के चुंगल से निकलना उसके लिए असंभव ,वो बलशाली और वह निर्बल अबला नारी ,सिर्फ शारीरिक रूप से अबला लेकिन मन शक्तिशाली ,वह उनके बाल नोच रही थी ,उन भेड़ियों को अपने दांतों से काट रही थी परन्तु उन जंगलियों से अपने तन को बचाने में वह नाकायाब रही ,बुरी तरह से घायल उस लड़की को उन भेड़ियों  ने मरा समझ वही छोड़ भाग गए ,हर रोज़ अखबार ऐसी मार्मिक दुर्घटनाओं से भरा होता है । आज  नारी की सुरक्षा को लेकर हर कोई चिंतित हो उठा ,बलात्कार हो याँ यौन शोषण इससे पीड़ित न जाने कितनी युवतियां आये दिन आत्महत्या कर लेती है और मालूम नही कितनी महिलायें अपने तन ,मन और आत्मा की पीड़ा को अपने अंदर समेटे सारी जिंदगी अपमानित सी  घुट घुट कर काट लेती है क्या सिर्फ इसलिए कि ईश्वर ने उसे पुरुष से कम शारीरिक बल प्रदान किया है |यह तो जंगल राज हो गया जिसकी लाठी उसकी भैंस ,जो अधिक बलशाली है  वह निर्बल को तंग कर सकता है यातनाएं दे सकता है ,धिक्कार है ऐसी मानसिकता लिए हुए पुरुषों पर ,धिक्कार है ऐसे समाज पर जहां मनुष्य नही जंगली जानवर रहतें है |जब भी कोई बच्चा चाहे लड़की हो याँ लड़का इस धरती पर जन्म लेता है तब उनकी  माँ को उन्हें जन्म देते समय एक सी पीड़ा होती है ,लेकिन ईश्वर ने जहां औरत को माँ बनने का अधिकार दिया है वहीं पुरुष को शारीरिक बल प्रदान किया ।
 महिला और पुरुष दोनों ही इस समाज के समान रूप से जरूरी अंग हैं लेकिन हमारे धर्म में तो नारी का स्थान सर्वोतम रखा गया है , नवरात्रे हो या दुर्गा पूजा ,नारी सशक्तिकरण तो हमारे धर्म का आधार है । अर्द्धनारीश्वर की पूजा का अर्थ यही दर्शाता है कि ईश्वर भी नारी के बिना आधा है ,अधूरा है।  । इस पुरुष प्रधान समाज में भी आज की नारी अपनी एक अलग पहचान बनाने में संघर्षरत है । जहाँ  बेबस ,बेचारी अबला नारी आज सबला बन हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही है वहीं अपने ही परिवार में उसे आज भी यथा योग्य स्थान नहीं मिल पाया ,कभी माँ बन कभी बेटी तो कभी पत्नी या बहन हर रिश्ते को बखूबी निभाते हुए भी वह आज भी वही बेबस बेचारी अबला नारी ही है । शिव और शक्ति के स्वरूप पति पत्नी सृष्टि का सृजन करते है फिर नारी को क्यों मजबूर और असहाय समझा जाता है  ।
अब समय आ गया है सदियों से चली आ रही मानसिकता को बदलने का और सही मायने में नारी को शोषण से मुक्त कर उसे पूरा सम्मान और समानता का अधिकार  दिलाने का ,ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां नारी पुरुष से पीछे रही हो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य निभाते हुए वह पुरुष के समान आज दुनिया के हर क्षेत्र में ऊँचाइयों को छू रही है ,क्या वह पुरुष के समान सम्मान की  हकदार नही है ?तब क्यूँ उसे समाज में दूसरा दर्जा दिया जाता है ?केवल इसलिए कि पुरुष अपने  शरीरिक बल के कारण बलशाली हो गया और नारी निर्बल।
हमे तो गर्व होना चाहिए कि इस देश की धरती पर लक्ष्मीबाई जैसी कई वीरांगनाओं ने जन्म लिया है ,वक्त आने पर जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति भी दी है और जीजाबाई जैसी कई माताएं भी हुई है जिन्होंने कई जाबाजों को जन्म दे कर देश पर मर मिटने की शिक्षा भी दी है ,नारी  की सुरक्षा और सम्मान ही एक स्वस्थ समाज  और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है ,जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह माँ ही है जो उसका प्रथम गुरु बनती है ,अगर इस समाज में नारी असुरक्षित होगी तो हमारी आने वाली पीढियां भी सदा असुरक्षा के घेरे में रहें गी और राष्ट्र का तो भगवान् ही मालिक होगा |

Monday, 27 May 2013

आईना जिंदगी का

आईना जिंदगी का [गीत]

मन यह मेरा  तो पगला है
पर आईना  वो जिंदगी का
.................................
डूब  जाता  है  कभी तो वो
भावनाओं   के समन्दर में
उमड़  उमड़  आता है प्यार
कोई अंत  नही नफरत का
...............................…
रोता  बिछुड़ने  से तो कभी
गीत खुशियों के गाता कभी
है   आँसू  भी  बहाता  कभी
पर प्याला  भी  है  प्रेम  का
..............................….
छोटा  सा  है  यह  जीवन  रे
हर पल  यूँ  हाथ  से  छूटा  रे
सुन   ओ  पगले  मनुवा  मेंरे
है  मोल बहुत रे इस पल का
...........................……
मन यह मेरा  तो पगला है
पर आईना  वो जिंदगी का

रेखा जोशी








Friday, 24 May 2013

कौन हूँ मै कौन हूँ



लोग मुझसे पूछते है,आज क्यूँ मै मौन हूँ ?

प्रेरणा के स्त्रोत सूखे ,कल्पना है मर गई ,
मौत के साए से यूं ,जिंदगी है डर गई
स्तब्ध सा मै देखता हूँ ,सत्य है या सपन है
पूछता हूँ मै स्वयं से ,कौन हूँ मै कौन हूँ ?

रूप कितने जन्म कितने ,मै बदलता आ रहा ,
ज्ञान का यह बोझ हूँ मै ,व्यर्थ ढोता जा रहा ,
युगों युगों से पूछता आया प्रश्न मै एक ही
न जिसका उत्तर मिल सका कौन हूँ मै कौन हूँ ?

गीत कितने छंद कितने ,मै बदलता जा रहा ,
अस्पष्ट सा जो दीखता ,स्पष्ट न कह पा रहा ,
गीत है लय बदलते ये ,स्वर मगर रहता वही,
हर गीत मेरा पूछता ,कौन हूँ मै कौन हूँ ?

लोग मुझसे पूछते है आज क्यूँ मै मौन हूँ ?

यह कविता मेरे पापा श्री महेन्द्र जोशी की लिखी हुई है ,मुझे पसंद आई इसलिए मै इसे पोस्ट कर रही हूँ |

Thursday, 23 May 2013

छाँव है कही ,कही है धूप जिंदगी ,


शाम का समय था ,न जाने क्यों रितु का मन बहुत बोझिल सा हो रहा था , भारी मन से उठ कर रसोईघर में  जा कर उसने अपने लिए एक कप चाय बनाई और रेडियो एफ एम् लगा कर वापिस आकर कुर्सी पर बैठ कर धीरे धीरे चाय पीने लगी |  चाय की चुस्कियों के साथ साथ वह संगीत में खो जाना चाहती थी कि एक पुराने भूले बिसरे गीत ने उसके दिल में हलचल मचा दी ,लता जी की सुरीली आवाज़ उसके कानो में मधुर रस घोल रही थी ,''घर से चले थे हम तो ख़ुशी की तलाश में ,गम राह में खड़े थे वही साथ हो लिए '', कभी ख़ुशी कभी गम ,कहीं सुख और कहीं दुःख ,इन्ही दोनों रास्तों पर हर इंसान की जिंदगी की गाड़ी चलती रहती है ,कुछ ही पल ख़ुशी के और बाकी दुःख को झेलते हुए ख़ुशी की तलाश में निकल जाते है | रितु अपनी ही विचारधारा  में खो सी गई थी ,क्या तलाश करने पर किसी को भी ख़ुशी मिली है कभी,शायद नही ,ख़ुशी तो अपने अंदर से ही उठती है ,जिस दिन उसके घर में ,उसकी बाहों में एक छोटी सी गुड़िया, नन्ही सी परी आई थी ,तब  उसकी और उसके पति राजेश की खुशियों का पारावार मानो सातवें आसमान को छू रहा था ,और हाँ जिस दिन राजेश की प्रमोशन हुई थी उस दिन भी तो हमारे पाँव जमीन पर ख़ुशी के मारे टिक नही रहे थे |हर छोटी बड़ी उपलब्धी से हमारे जीवन में अनंत खुशियों का आगमन होता है ,चाहे हम अपनी मनपसंद वस्तु की खरीदारी करें यां फिर हमारी किसी इच्छा की पूर्ति हो ,अगर हमारी कोई अभिलाषा पूरी नही हो पाती तो हमे क्रोध  आता है ,आकोश पनपता है और हम  निराशा एवं अपार दुःख में डूब जाते है |वह इसलिए कि जैसा हम चाहते है वैसा हमे मिल नही पाता ,ऐसी परिस्थितियों  से कोई उभर कर उपर उठ जाए ,यां आशा ,निराशा में सामंजस्य स्थापित कर सके तो हमारा दामन सदा खुशियों से भरा रहे पाए गा |अपने अंतर्मन की ऐसी आवाज़ सुन कर अनान्यास ही रितु के मुख से निकल पड़ा ''नही नही .यह तो बहुत ही मुश्किल है ,जब हम उदास होतें है तब तो हम और भी अधिक उदासी एवं निराशा में डूबते चले जाते है ,''|उन भारी पलों में हमारी विचारधारा ,हमारी सोच केवल हमारी इच्छा की आपूर्ति न होने के कारण  उसी के इर्द गिर्द घड़ी की सुई की तरह घूमती रहती है |इन्ही पलों में  अगर हम अपनी विचार धारा को एक खूबसूरत दिशा की ओर मोड़ दें तो जैसे  जलधारा को नई दिशा मिलने के कारण बाढ़ जैसी स्थिति को बचाया जा सकता है ठीक वैसे ही विचारों के प्रवाह की दिशा बदलने से हम निराशा की बाढ़ में डूबने से बच सकतें है |हमारी जिंदगी में अनेकों छोटी छोटी खुशियों के पल आते है ,क्यों न हम उसे संजो कर रख ले ?,जब भी वह पल हमे याद आयें गे हमारा मन प्रफुल्लित हो उठे गा |क्यों न हम अपने इस जीवन में हरेक पल का आनंद लेते हुए इसे जियें ? जो बीत चुका सो बीत चुका ,आने वाले पल का कोई भरोसा नही ,तो क्यों न हम इस पल को भरपूर जियें ?इस पल में हम कुछ ऐसा करें जिससे हमे ख़ुशी मिले ,आनंद मिले |जो कुछ भी हमे ईश्वर ने दिया है ,क्यों न उसके लिए  प्रभु को धन्यवाद करते हुए , उसका उपभोग करें |''हर घड़ी बदल रही है रूप जिंदगी ,छाँव है कही ,कही है धूप जिंदगी ,हर पल यहाँ जी भर जियो ,जो है समां कल हो न हो ''रेडियो पर बज रहे इस गीत के साथ रितु ने भी अपने सुर मिला दिए

Tuesday, 21 May 2013

यह जो मुहब्बत है ..

सावन के अंधे को जैसे सब ओर हरा ही हरा दिखाई देता है वैसे ही जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते ही नवयुवक और नवयुवतियाँ दोनों के बीच एक दूसरे के प्रति आकर्षण इस कदर हावी हो जाता है कि जैसे सिवा उनकी मुहब्बत के इस दुनिया में और कुछ है ही नही, अपने आप को लैला मजनू ,रोमियो जुलीयट से कम नही समझते यह लोग |यही हाल था सोनू और अंशु का ,रात दिन एक दूसरे के ख्यालों में खोये हुए ,जैसे सारी की सारी दुनिया उन दोनों के बीच में ही सिमट कर रह गई हो ,कितनी विचित्र बात है माँ बाप ,भाई ,बहन और सारे रिश्ते नाते सभी पराये हो जाते है जब मुहब्बत के आईने में पागल प्रेमी देखने लगते है तब अपने प्रियतम के सिवा उन्हें और कुछ दिखाई ही नही देता,दिखाई देगा भी कैसे, यह उम्र ही ऐसी है, किशोरावस्था का प्यार ,उस समय वह अपने शारीरिक और मानसिक विकास का आपस में सामंजस्य को तो स्थापित कर नही पाते लेकिन प्यार मुहब्बत की रंगीन दुनिया उनकी आँखों में बखूबी बस जाती है |जब अंशु की माँ ने उसे उसके कच्ची उम्र के प्यार के बारे में समझाना चाहा तो उसे अपनी माँ भी दुश्मन नजर आने लगी जो जिंदगी में उसकी खुशियाँ चाहती ही नही ,यह सोच ,भावना में बह कर बरबस अंशु की आँखों में आंसू आ गए ,उसने तो मन में पक्का निश्चय कर लिया कि अब चाहे कुछ भी हो वह शादी करेगी तो सिर्फ सोनू से ,अगर माँ बाप नही मानते तो वह सोनू के साथ भाग कर शादी कर लेगी ,जो भी अंजाम होगा देखा जायेया गा |अंशु के मम्मी पापा ने अपनी रजामंदी दे कर अपनी बच्ची की जिद और प्यार के आगे घुटने टेक दिए लेकिन जिस गाँव में वो रहते थे वहां की पंचायत ही इस रिश्ते के खिलाफ थी,उन दोनों का एक ही गोत्र का होना उनकी शादी में अड़चन पैदा कर रहा था जो सबकी परेशानी का सबब बन चुका था |न जाने कितने ही मासूम बच्चों ने जात पात ,खाप पंचायतों ,माँ बाप व् अन्य रिश्तेदारों की रजामंदी न मिलने के कारण मुहब्बत के आईने में इक दूजे को देखते हुए इस दुनिया से सदा के लिए विदा ले ली,यह सोच सोच कर अंशु के घरवाले बहुत परेशान थे,उसके माँ बाप बहुत दुविधा में पड़ गए ,इधर कुआं तो उधर खाई ,उन्होंने अंशु के बालिग़ होने तक इंतज़ार किया और फिर पुलिस प्रोटेक्शन ले कर उन दोनों की शादी कर दी ,सोनू और अंशु एक दूसरे को पा कर फूले नही समा रहे थे लेकिन अभी भी उन के सिर पर पंचायत की तलवार तो टंगी हुई थी जो इस शादी का लगातार विरोध कर रही थी |किशोरावस्था के इस प्यार के कारण अनगिनत जिन्दगियां बर्बाद हो चुकी है और कई बर्बाद हो रहीं है ,कई नाबालिग लडकियाँ गलत हाथों में पड़ कर अपना जीवन तबाह कर बैठती है ,ऐसे लोगों की कमी नही जो प्यार भरी मीठी मीठी बातें कर इन बच्चियों को बहला फुसला कर शादी का वादा कर के याँ झूठ मूठ की शादी रचा कर उन्हें आगे बेच देते है याँ उन्हें नाजायज़ धंधा करने पर मजबूर कर देतें है ||माँ बाप के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नही होता जो सदा अपने बच्चों का हित ही चाहतें है वह कैसे उन्हें गलत रास्ते पर चलने दे सकते है और बच्चे अपने बड़े बूढों की बातों को अनसुना कर अपनी मनमानी करना चाहते है ,वह इसलिए कि हम माँ बाप उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल कर अपनी बात मनवाना चाहते है | अपने बच्चों के किशोरावस्था में कदम रखते ही अगर माता पिता उन्हें अपने विशवास में ले कर उनके साथ मित्रतापूर्वक व्यवहार से उनकी हर अच्छी बुरी बात को समझने कोशिश करें और उनकी भावनाओं को समझ कर हर छोटी बड़ी बात को उनके साथ बांटना शुरू कर दें ,उनके दोस्तों और सहपाठियों को भी अपने बच्चों जैसा समझ कर समय समय पर उनके विचारों की भी जानकारी लेते रहें तो इसमें कोई दो राय नही होगी कि उनके बच्चे जिंदगी में कुछ भी करने से पहले एक बार अवश्य ही उनकी बताई हुई बातों को सोचे गे यां यह भी हो सकता है कि वह उनके बताये हुए रास्ते पर ही चलें ,अगर मान लो वह किसी के साथ प्रेम प्रसंग बढायें गे भी तो मुहब्बत के आईने में एक परिपक्व प्रेम ही उभर कर आये गा |