Saturday, 31 October 2015

ज़ख्म हमको इस ज़माने ने दिये अब

हाथ थामें दूर साजन आज जाना 
साथ दे कर प्यार को अब तुम  निभाना
....
राह मुश्किल ज़िंदगी की जान लो तुम
छोड़ कर अब तुम हमें मत दूर जाना
....
जब कभी भी  राह में आये मुसीबत
थाम लेना तुम हमें अपना बनाना
…
ख़्वाब जो हम को दिखाये ज़िंदगी ने
तोड़ कर फिर तुम उसे वापिस न जाना
…
ज़ख्म हमको इस  ज़माने ने दिये अब
ज़िंदगी मेरी गई बन इक फ़साना 

रेखा जोशी 

जाग जाओ देश मिलकर है बचाना

जाग जाओ देश मिलकर है बचाना 
नींद में सोये हुओं को  है जगाना 
…
साँस दुश्मन को मिटा कर आज लेंगे 
साथ मिलकर है बुराई  को मिटाना 
… 
मिट गये है देश पर लाखो सिपाही
आज कुर्बानी ज़माने को बताना
…
देश के दुश्मन छिपें घर आज  अपने
पाठ उनको ढूँढ कर अब है पढ़ाना 
…
प्यार  से मिलकर रहें आपस सदा हम 
आज मिलकर देश को आगे बढ़ाना 

रेखा जोशी 


Friday, 30 October 2015

रो रहा अब सत्य और झूठ यहाँ हँसता है

रो रहा अब सत्य और झूठ यहाँ हँसता  है 
पुण्य  मांगे  भीख औ  पाप यहाँ फलता है 
झूठे  पड़े  सब  संस्कार जो दिए  थे माँ ने 
दुराचारी  फले  सदाचारी यहाँ   मरता   है 

रेखा जोशी

Thursday, 29 October 2015

साथ तेरे सजन अब चले ज़िंदगी

मिल  गये  गर  हमें तुम मिले ज़िंदगी 
जो   बहारें    मिले   तो  खिले  ज़िंदगी 
ज़िंदगी कुछ नहीं गर न हम तुम मिले 
साथ   तेरे   सजन  फिर  चले  ज़िंदगी 

रेखा जोशी 




Wednesday, 28 October 2015

चूमती पग नव उषाकिरण


मिलकर खुशियाँ मनायें हम 
पँख    सुनहरी  फैलायें   हम 
चूमती  पग  नव  उषाकिरण 
आसमाँ   को  छू  पायें   हम 

रेखा जोशी 

Tuesday, 27 October 2015

जहाँ टेकने पड़ते घुटने वक्त के आगे


मत देखो ख़्वाब 
जो कभी 
पूरे हो नही सकते 
सुन्दर हो कितने भी 
रेत के महल 
आखिर इक दिन तो
 है गिरना  उन्हें 
कभी कभी 
ज़िंदगी भी हमें 
है ले लाती 
ऐसी राह पर 
जहाँ टेकने पड़ते 
घुटने 
वक्त के आगे 
और बस सिर्फ 
है करना पड़ता 
इंतज़ार
न जाने कब तक 

रेखा जोशी 

रूठो तुम हम मनाते रहें

सपनों को हम सजाते रहें
बातें   अपनी  सुनाते  रहें
समाये ह्रदय में तुम ही तुम
रूठो  तुम हम मनाते रहें

रेखा जोशी