फूलों को बगिया में मुस्कुराते देखा
भँवरों को भी गुन गुन गुनगुनाते देखा
कुहुक रही कोयलिया यहाँ डार डार
तितली को भी उत्सव मनाते देखा
रेखा जोशी
फूलों को बगिया में मुस्कुराते देखा
भँवरों को भी गुन गुन गुनगुनाते देखा
कुहुक रही कोयलिया यहाँ डार डार
तितली को भी उत्सव मनाते देखा
रेखा जोशी
फ़ूलों से सजी आज क्यारी है
अँगना खिली आज फुलवारी है
छाई मोहब्बत चहुँ ओर आज
धड़कन बस में नहीं हमारी है
रेखा जोशी
2122 2122, 2122 21
दूर दोनों आज सबसे ,चलें हम उसपार
अब खिलेगा ज़िन्दगी में,प्यार का संसार
,
चल रहे हम साथ ले कर, हाथ में अब हाथ
प्यार की हम पर यहाँ बरसे सदा बौछार
..
राह मुश्किल जान कर तुम ,रुकना मत आज
फिर करेगी आज हम पर ,ज़िन्दगी उपकार
,
साथ मिल कर जब चले हम ,मीत रहना पास
कर लिया तेरी सजन अब,प्रीत को स्वीकार
,
तुम निभाना साथ मेरा, हम रहेंगे साथ
है खुशी अब ज़िन्दगी में,तुम देना अधिकार
रेखा जोशी
122. 122. 122. 122
न जाने सजन क्यों खफा हो रहा है
हमें दर्द दे कर जुदा हो रहा है
,
निभाई नही प्रीत उसने कभी भी
किया प्यार उसने गुमा हो रहा है
,
सताये हमें याद तेरी कहाँ हो
रहे जागते क्या यहाँ हो रहा है
,
गये छोड़ हमको सजन तुम कहाँ पर
बिना प्यार जीवन सजा हो रहा है
,
रहे हम अकेले रहा प्यार तन्हा
किसी का नहीं अब भला हो रहा है
रेखा जोशी
रिश्ते पनपते जहां प्यार हो आधार
बीत गये दिन कभी रिश्तों में था प्यार
रिश्तों में उगने लगी आज नागफनी
जीवन का समझ मे आता है अब सार
रेखा जोशी
212 212 2122
प्यार बिन चैन खोते हमारे
याद में नैन रोते हमारे
जी लिये चार दिन ज़िन्दगी के
काश तुम संग होते हमारे
रेखा जोशी
राजनीति करते नेता कैसे कैसे हमारे
भाई भाई को लड़ाते यहाँ कैसे सुधारें
अपने फायदे के लिये कराते दंगा फसाद
सोचे जनता अपने भारत को कैसे सँवारे
रेखा जोशी