Wednesday, 29 November 2017

हाइकु


हाइकु

खुशी के गीत
कुहुकती कोयल
जगाती  प्रीत
,
जगाती प्रीत
सजन अलबेला
मन का मीत
,
मन का मीत
बहुत तड़पाये
जाने न प्रीत
,
जाने न प्रीत
समझ नहीं पाता
प्रीत की रीत

रेखा जोशी

Tuesday, 28 November 2017

पिंजरे का पंछी

बचपन में माँ एक कहानी सुनाया करती थी कि एक राक्षस किसी देश की राजकुमारी को उठा कर ले गया था लेकिन कहानी का अंत बहुत सुखद होता था, कोई राजकुमार बहुत सी कठिनाइयाँ झेल कर राजकुमारी को राक्षस के चुंगल से बचा लिया करता था l

आज न जाने कितने महीने गुज़र गये मीना को अपने राजकुमार का इंतज़ार करते हुए, उफ़ कितनी भयानक रात थी जब वह रात को आफिस से घर लौट तब किसी राक्षस ने उसे पकड़ लिया था, कितना चीखी थी मीना लेकिन तब से वह उस ज़ालिम की केद में तड़प तड़प कर दिन गुज़ार रही थी, कब इस बंद पिंजरे से उसे आज़ादी मिलेगी, लेकिन आज़ादी उसके नसीब में नहीं थी, नही जानती थी कि उसके राजकुमार ने ही मीना को बेच दिया था उस राक्षस को l

रेखा जोशी

Sunday, 26 November 2017

बादलों की ओट मुख दिखाता है चाँद

बादलों की ओट मुख दिखाता है चाँद
पानी की लहरों पे लहराता है चाँद
..
आ गये हम तो यहाँ परियों के देश में
यहाँ चाँदनी पथ पे बिखेरता है चाँद
..
दीप्त हुआ चाँदनी से चेहरा तेरा
रोशन हुआ आलम जगमगाता है चाँद
..
आये तेरी महफ़िल में अब हम भी सनम
तारों संग नभ पे मुस्कुराता है चाँद
.?

सुंदर नज़ारों को बसा लिया पलकों में
अब देख कर हमे यहाँ शर्माता है चाँद

रेखा जोशी

Friday, 24 November 2017

लहर  लहर  लहराते  गाते  नदिया  में  प्रेम  के गीत

हंस  हंसिनी का जोड़ा  निर्मल जल में लगा झूमने
चाँद सा मुखड़ा देख हंसिनी का लगा हंस चहकने
,
कमल खिले खुशियों के तब जैसे खिले कलियों से फूल
मिले  इक  दूजे  के  दिल  लगे  संग  संग वोह  धड़कने
,
लहर  लहर  लहराते  गाते  नदिया  में  प्रेम  के गीत
प्रियतम से मिल लिखी प्रेम कहानी  प्रीत लगी मचलने
,
बना  रहे  स्नेह सदा आती  रहें  बहारें ज़िन्दगी में
देख प्यार दोनों का तरंगिनी भी अब लगी बहकने
,
इक दूजे का बन  सहारा   जीते  इक  दूजे  को देख
हाथ जोड़  भगवन  से मांगे जन्‍म जन्‍म का साथ बने

रेखा जोशी 

Thursday, 23 November 2017

याद तेरी सता रही है मुझे


याद तेरी  सता रही है मुझे 
ज़िन्दगी अब बुला रही है मुझे 
. 
चोट खाते  रहे  यहाँ साजन 
पीड़  दिल की जला  रही है मुझे 
. 
छिप गये हो कहाँ जहाँ में तुम 
याद फिर आज आ रही है मुझे 
.. 
सिलसिला प्यार का न टूटे अब 
मौत जीना सिखा  रही है मुझे 
... 
आ मिला कर चलें कदम हम तुम 
चाह तेरी  लुभा रही है मुझे 

रेखा जोशी 

Tuesday, 21 November 2017

शादी जी हाँ शादी

शादी जी हाँ शादी
था सुना करते
यह तो है बरबादी
,
कहते थे बड़े बुजुर्ग
कर लो मौज अभी
पता चलेगा
आटे दाल का भाव
जब होगी शादी
मत पड़ना इस चक्कर में
यह तो है बरबादी
,
लेकिन नहीं माना मन
ललचा गया
बेताब हो उठा
खा ही लिया शादी का लड्डू
बंध गए विवाह के बंधन में
सोचा अब तो पड़ेगा पछताना
क्योकि
यह तो है बरबादी
,
नहीं सोचा था कभी
खूबसूरत प्यारे इस बँधन से
मिलेंगी खुशियाँ हज़ार  हमेँ
बदल देगा दुनिया हमारी
मिला जीवन साथी इक प्यारा
बना वह सुख दुख का सहारा
वह तो निकला
जन्‍म जन्‍म का साथी
कर दी सुबह और शाम
हमने उसके नाम
नहीं समझे जो
प्यारे इस बँधन को
वोही है कहते
यह तो है बरबादी

रेखा जोशी

Saturday, 18 November 2017

नहीं मुश्किल नदी के पार होना

नहीं मुश्किल नदी के पार होना
रहे माँझी  अगर बेदार होना
,
हमारे ख्वाब है पूरे हुए अब
कहो उनसे न फिर मिस्मार होना
,
कहें कैसे  सजन से बात दिल की
झुकी आँखें कहें है आर होना
,
सहारा कौन देता इस जहां में
उठो खुद ही न फिर बेगार होना
,
रखा हमने छुपा कर प्यार दिल में
निगाहों से बयां हैं प्यार होना
,
सितारों से सजी महफिल यहां पर
किसी का आज  है दीदार होना

रेखा जोशी