Saturday, 25 April 2026
मुक्तक
आधार छंद भुजंगप्रयात
मुक्तक
122 122 122 122
कहानी हमारी रही अनकही है
किसी को हमारी खबर ही नहीं है
अधूरे रहे आज सपने हमारे
किनारे लगी आज नैया नहीं है
रेखा जोशी
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