Thursday, 29 January 2015

गरल पी कर नीलकंठ शिव कहलाये


जीवन में गरल सुधा मिल के हम पियें 
स्वाती अमृत सी सुधा पी के सब जियें 
गरल  पी  कर  नीलकंठ शिव कहलाये 
जी रहे हम  विष कंठ धारण कर लिये 

रेखा जोशी 

Wednesday, 28 January 2015

प्यार में अब सनम हर ख़ुशी मिल गई

गीतिका
मापनी ---2  1 2 2 1 2   2 1 2 2 1  2
पदांत----अगी  मिल  गई
समांत -----अ

प्यार में अब सनम हर ख़ुशी मिल गई
ज़िंदगी  की  कसम  ज़िंदगी  मिल गई
…
तुम  मिले  छा   गई  अब  बहारें   यहाँ
हसरतों  को  बलम  ज़िंदगी  मिल  गई
…
मिल गया  है  खुदा  जो मिले तुम हमें
तुम  मिले तो  गज़ब  बंदगी  मिल गई
....
खूबसूरत    नज़ारे    पुकारे    हमे
देख  इन को  अजब  ताज़गी मिल गई
…
 खो  गये  देख  मासूम  सा चेहरा
प्यार में अब  सजन  सादगी मिल गई

रेखा जोशी 

जा रहे हो दूर हमसे तुम बहुत

अब  तुझे अपना सजन मै  प्यार दूँ 
जान तुझ  पर बस सजन  मै वार दूँ 
जा   रहे   हो  दूर  हमसे  तुम  बहुत 
आज   साजन  प्यार  का  उपहार दूँ 

रेखा जोशी 

Tuesday, 27 January 2015

मत खेलो कुदरत से खेल

काटो पेड़
जंगल जंगल
मत खेलो
कुदरत से खेल
कर देगी अदिति
सर्वनाश जगत का
हो जायेगा
धरा पर
सब कुछ फिर मटियामेल
कुपित हो कर
प्रकृति भी तब
रौद्र रूप दिखलाएगी
बहा ले जायेगी सब कुछ
संग अपने जलधारा में
समा जायेगा
जीवन भी उसमे
कुछ नही 
बच पायेगा शेष 
फिर
कुछ नही
बच पायेगा शेष

रेखा जोशी

न कोई था हमारा यहाँ पर

दूर हमसे जब किनारे हो गये
बदरंग सब जब नज़ारे हो गये
न  कोई  था  हमारा  यहाँ  पर
हमारे   तुम   सहारे    हो  गये

रेखा जोशी 

Sunday, 25 January 2015

आंच न देंगे आने कभी आज़ादी पे हम

सीमा  पर   सेनानी   लड़ने  को  तैयार  है
शान  तिरंगे  की  हम  रखने  को  तैयार है
आंच न  देंगे  आने  कभी आज़ादी  पे  हम
देश  के  लिये हम  मर मिटने को तैयार है

रेखा जोशी

बस यही इक पल

आगोश अपने में
ले रही
मौत हर पल
अब जो है पल
मिट रहा
जा चुका वह
काल में
आ रहा फिर
नव पल
तैयार है मिटने को 
वह  पल 
पल पल
मिट रही यह ज़िंदगी
है जो अपना
बस यही इक पल
कर ले पूरी
सभी चाहते
बस इसी 
इक पल में
है संवार सकता
जीवन
बस यही इक पल

रेखा जोशी